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वृक्ष की खेती करने से ही किसानों को मिलेगी सुखाड़ और अकाल से निजात : कौशल

  • किसानों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट का काम करता है वृक्ष की खेती:

  • - महिलाओं को बच्चों की तरह ही पौधों का करना होगा देखभाल..

  • - दशहरी आम और मछली के लिए उपयुक्त है पलामू की मिट्टी और जलवायु..

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छत्तरपुर । पलामू 
विश्वव्यापी पर्यावरण संरक्षण अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पर्यावरण धर्म व वनराखी मूवमेंट के प्रणेता पर्यावरणविद कौशल किशोर जायसवाल ने छतरपुर प्रखंड के केरकी स्थित शिव तपोभूमि कुटिया परिसर में पौधरोपण कर कार्यक्रम की शुरुआत की। पर्यावरण धर्म पर आयोजित गोष्ठी में विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि लगातार क्षेत्रों में सुखाड़ और अकाल की मार झेल रहे किसानों को वृक्ष की खेती अपनाना होगा। उससे न सिर्फ उन्हें सुखाड़ और अकाल की उतपन्न स्थिति से निजात मिलेगी बल्कि समाज में फैली प्रदूषण की जहर और बेतहासा बढ़ रही धरती के तापमान पर भी काबू पाने में कामयाबी मिल सकेगी । छतरपुर के शिव तपोभूमि कुटिया परिसर में अमरूद का पौधा लगाकर कार्यक्रम की शुरुआत प्रार्थना से करते हुए कौशल ने वहां उपस्थित लोगों को पर्यावरण धर्म के आठ मूल मंत्रों की शपथ दिलाई। नेपाल भूटान समेत देश के दस राज्यों में दो लाख निःशुल्क पौधा रोपण और वितरण का लक्ष्य निर्धारित कर अभियान की शुरुआत डाली बाजार के कौशल नगर से एक जुलाई को की गई है। अबतक कई जिलों में पौधरोपण और वितरण का कार्य संपन्न हो चुका है और आगे भी जारी है। उन्होंने कहा कि महिलाएं जिस तरह से अपने बच्चों की देखभाल करने में निपुण होती है उसीतरह पौधों का भी निगरानी और सुरक्षा करें। उन्होंने कहा कि यहां के किसान अगर वृक्ष की खेती करते हैं तो उससे न सिर्फ उनकी आमदनी बढ़ेगी बल्कि प्रदूषण को कम करने में भी वे मददगार साबित होंगे। साथ- साथ समाज के लोग कई बीमारियों की चपेट में आने से भी बचेंगे। उन्होंने सभी लोगों को पांच से 10 पौधे लगाने और बचाने की सलाह दी। ताकि आने वाली भयावह स्थिति से निबटा जा सके। 
उन्होंने यह भी कहा कि यहां की जलवायु और मिट्टी दशहरी आम और मछली के लिए काफी उपयुक्त है। जिसका लाभ किसानों को लेना चाहिए। उन्होंने वर्तमान की स्थितियों से निबटने के लिए पूर्व से चलते आ रही खेती के तरीकों और सोच बदलने की जरूरत बताई। कार्यक्रम का समापन पर्यावरण धर्म के स्लोगन " सोचे साथ क्या ले जायेंगे एक पौधा लगाएंगे तो सात पीढ़ी तर जाएंगे " के साथ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता रविंदर राम और संचालन संतोष प्रसाद ने किया। मौके पर उपस्थित मुखिया दुलारी देवी,सुभाष चंद्र बोस, मनोज प्रसाद गुप्ता ,विष्णु विश्वकर्मा,चंदन विश्वकर्मा, गिरजा सिंह , शशि प्रसाद, शंकर सिंह,दीपक प्रसाद , बिरेंद्र प्रसाद ,बलभद्र प्रसाद, कमला देवी, राजपति देवी समेत आसपास के लगभग 20 गांव के ग्रामीणों ने पर्यावरण धर्म की शपथ ली।