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बिहार की 'लेडी सिंघम' जिसने अनंत सिंह जैसे बाहुबलियों के भी छुड़ा रखे हैं पसीने

लिपि ने पुलिस फोर्स ज्वाइन करने के बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. उनका डंडा कानून के हिसाब से बालू माफिया और अपराधियों के खिलाफ लगातार चलता रहा है. अनंत सिंह के घर हुई रेड में भी टीम को लिपि सिंह लीड कर रही थीं.

बिहार के पुलिस महकमे (Bihar Police) में जो नाम इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा में है वो लिपि सिंह (Lipi Singh) का है. मिशन 'अनंत' यानि मोकामा से बाहुबली विधायक अनंत सिंह (MLA Anant Singh) की गिरफ्तारी के लिए कमर कस चुकी इस लेडी आईपीएस अधिकारी (IPS Officer) को लोग आज 'लेडी सिंघम' (Singham) कहकर बुला रहे हैं. सामान्य कद काठी की इस महिला अधिकारी से इलाके के अपराधी तो थर्राते ही हैं, खुद अनंत सिंह (Anant Singh) जैसे बाहुबली (Bahubali) के नाक में भी दम हो रखा है.

शायद यही कारण है कि अनंत सिंह खुद भी उन पर लगातार कई आरोप लगा चुके हैं.

कौन है लिपि सिंह 

लिपि सिंह जदयू के राज्‍यसभा सांसद आरसीपी सिंह की बेटी हैं. आरसीपी सिंह की पहचना न केवल जेडीयू के सासंद के तौर पर होती है बल्कि वो मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के निकट सहयोगी और पूर्व आईएएस भी हैं. आरसीपी की बड़ी बेटी लिपि सिंह ने यूपीएससी की सिविल सर्विस परीक्षा को साल 2015 में पास किया था और आईपीएस अधिकारी बनीं.

2015 की सिविल सर्विस परीक्षा में लिपि सिंह को 114वां रैंक मिला था. 33 साल की लिपि सिंह को नालंदा जिले से पहली महिला आईपीएस आफिसर बनने का गौरव प्राप्‍त हुआ है. बिहार के नालंदा जिले की पहचान आईएएस-आईपीएस की फैक्ट्री के रूप में होती है. आरसीपी सिंह मूल रुप से नालंदा जिले के अस्‍थावां प्रखंड के मुस्‍तफापुर गांव के निवासी हैं.

लिपि सिंह का सपना आईपीएस अधिकारी बनने का था जो उन्होंने पूरा कर के दिखाया है. लिपि ने दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई की है. आईपीएस बनने के उनका सेलेक्‍शन एलायड सर्विस के लिए हो गया था. लेकिन लिपि ने सर्विस ज्‍वाइन करने के बजाय फिर से परीक्षा दी और आईपीएस बन गई. लिपि ने ट्रेनिंग में भी बढ़िया काम किया था. ट्रेनिंग के बाद उनको केन्‍द्रीय गृह मंत्रालय ने बिहार काडर अलॉट कर दिया था.

आईएएस अधिकारी थे आरसीपी सिंह 

आरसीपी सिंह भी राजनीति में आने के पहले आईएएस अधिकारी ही थे. उन्‍हें यूपी काडर में लंबे समय तक काम किया था. नीतीश कुमार जब केन्‍द्र में मंत्री बने, तो आरसीपी सिंह दिल्‍ली में उनके प्राइवेट सेक्रेट्री थे. इस दौरान दोनों ने लंबे समय तक साथ में काम किया. साल 2005 में जब नीतीश कुमार पहली बार बिहार के मुख्‍य मंत्री बने, तब आरसीपी सिंह प्रिंसिपल सेक्रेट्री बनकर आये. कहा जाता है कि आरसीपी सिंह ने नीतीश कुमार के कहने पर आईएएस की नौकरी छोड़ दी और फिर जेडीयू ज्वाइ किया. नीतीश ने उनको राज्‍यसभा का सांसद बनाया और फिलहाल वो पार्टी में नंबर 2 की हैसियत रखते हैं.

थर्रथर कांपते हैं इलाके के अपराधी 

लिपि ने पुलिस फोर्स ज्वाइन करने के बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. उनका डंडा कानून के हिसाब से बालू माफिया और अपराधियों के खिलाफ लगातार चलता रहा है. अनंत सिंह के घर हुई रेड में भी टीम को लिपि सिंह लीड कर रही थीं. बाढ़ की एएसपी होने के नाते उन्होंने न केवल इलाके में अपराधियों का जीना मुहाल कर रखा है बल्कि शराब, बालू, समेत अवैध हथियारों के कारोबार पर भी नकेल कस कर रखा था. अनंत सिंह के समर्थकों पर लिपि सिंह का कहर लगातार टूटता रहा है. लिपि के बारे में कहा जाता है कि वो अपने अधिकारियों को आदेश देने की बजाए अधिकांश ऑपरेशन को खुद लीड करती हैं.