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बेहतर शिशु स्वास्थ्य में बौनापन है बाधक

 बेहतर शिशु स्वास्थ्य में बौनापन है बाधक 

 वर्ष 2025 तक बौनापन में 40 प्रतिशत तक की कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित 

   राज्य के 15 जिले लक्ष्य हासिल करने में होंगे सक्षम 

बिहारशरीफ -4 सितम्बर-राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार बिहार में 5 साल से कम उम्र के बच्चों में बौनापन वर्ष 2006 में 56 प्रतिशत था, जो वर्ष 2016 में घटकर 48 प्रतिशत हो गया है। यह आंकड़े पोषण स्तर में आए सुधार को दिखाता है, लेकिन विश्व हेल्थ एसेंबली द्वारा वर्ष 2025 तक बौनापन 40 प्रतिशत तक घटाने के लक्ष्य को हासिल करने में कई चुनौतियाँ भी पेश करता है। 

नालंदा जिले में बौनापन का प्रतिशत 2012-13 में 52.4 था जो की 2015-16 में बढ़कर 54 प्रतिशत हो गया है जो की चिंता का विषय है तथा यह भी दर्शाता है की पोषण मानकों में सुधार हेतु जिला में काफी कुछ करना बाकी है . जिला का लक्ष्य बौनेपन को 32.5 प्रतिशत करने का है तथा इस तरह से जिला को लक्ष्य प्राप्ति में काफी समय लगेगा.

डॉ. मन्त्रेश्वर झा कंसल्टेंट पोषण अभियान वर्ल्ड बैंक ने बताया पिछले दस साल में बिहार में बौनापन में कमी आई है। बिहार में वर्ष 2006 में बौनापन 56 प्रतिशत था, जो वर्ष 2016 में घटकर 48 प्रतिशत हो गया है। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पोषण अभियान अहम भूमिका अदा कर रहा है। साथ ही पोषण माह का आयोजन लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहयोगी साबित होगा। 

बौनापन में आई है कमी : बिहार के 38 जिलों में 25 जिले ऐसे हैं जहाँ वर्ष 2012-13( एनुअल हेल्थ सर्वे) की तुलना में वर्ष 2015-16 (राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण) में बौनापन में कमी दर्ज़ हुई है। राज्य के सभी जिलों में बौनापन के आंकड़ें एवं को देखने से ज्ञात होता है कि बिहार के 15 जिले वर्ष 2025 तक निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने में सफल हो सकेंगे।पटना में 59.4% से 44%, जमुई में 63.1% से 46%, बक्सर में 59.2% से 44%, मुंगेर में 61.4% से 47%, सीवान में 49.3% से 38%, बेगूसराय में 57.8% से 45%, अरवल में 64.6% से 50%, सहरसा में 55.2% से 44%, जहानाबाद में 64.6% से 52%, अररिया में 57.4% से 48%, रोहतास में 57.3% से 49%, मुजफ्फरपुर में 55.8% में 48%, खगड़िया में 58% से 50%, दरभंगा में 56.5% से 49% एवं पश्चिम चंपारण में 50.1% से घटकर 44 प्रतिशत हो गया है। वार्षिक औसत कमी दर के अनुसार इन 15 जिलों में वर्ष 2024 तक बौनापन 40 प्रतिशत तक कम हो सकेगा।

इन 15 जिलों के अलावा 10 अन्य जिलों में भी बौनापन में कमी दर्ज हुयी है। जिसमें भोजपुर में 48.7% से 44%, गोपालगंज में 39.6% से 36%, पूर्व चंपारण में 52.2% से 47%, शेखपुरा में 50.5% से 46%, किशनगंज में 50.9% से 47%, सुपौल में 51.4% से 48%, भागलपुर में 48.9% से 47%, लखीसराय में 52.8% से 51%, समस्तीपुर में 51% से 49% एवं औरंगाबाद में 52.1% से घटकर 50 प्रतिशत हो गया है।  

बौनापन के कारण आर्थिक उत्पादकता में 1.4 प्रतिशत का नुकसान : विश्व बैंक के अनुसार बौनापन के कारण किशोरों के लंबाई में 1 प्रतिशत की कमी आर्थिक उत्पादकता में 1.4 प्रतिशतका नुकसान होता है। उम्र के हिसाब से कम लंबाई को बौनापन कहा जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार ख़राब पोषण एवं नियमित संक्रमण के कारण बौनापन होता है। बौनापन के कारण शारीरिक एवं प्रजनन विकास में कमी के साथ बौद्धिक विकास भी बाधित होता है। बौनापन के कारण डायरिया,मलेरिया,मीजिल्स,निमोनिया के साथ मधुमेह जैसे गंभीर रोगों के होने की संभावना बढ़ जाती है।   

पोषण मानकों में सुधार से बौनापन में 20 प्रतिशत तक कमी संभव : लेंसेट द्वारा वर्ष 2013 में जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक 10 पोषण मानकों में सुधार से बौनापन में 20 प्रतिशत तक एवं शिशु मृत्यु दर में 15 प्रतिशत तक कमी लायी जा सकती है।

शुरुआती एक घंटे में माँ का गाढ़ा पीला दूध 

6 माह तक केवल स्तनपान( ऊपर से पानी भी नहीं)

6 माह के बाद पूरक आहार कि शुरुआत

उम्र के मुताबिक पूरक आहार प्रदान करना 

6 माह से 24 माह तक शिशु का बेहतर पोषण( मात्रा एवं गुणवत्ता दोनों में)

पूरक आहार का सुरक्षित प्रबंधन एवं स्वच्छता 

बीमारी के समय एवं बाद दोनों स्थितियों में शिशु का बेहतर पोषण 

टीकाकरण एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों का अनुपूरण

अति- कुपोषित बच्चों का बेहतर पोषण