नोआमुंडी में टाटा स्टील ने विश्व वानिकी दिवस का जश्न मनाया


संतोष वर्मा। जैव विविधता को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धताओं की पुष्टि करते हुए टाटा स्टील ने नोआमुंडी में विश्व वन दिवस के अवसर पर सांपों पर आधारित एक अनूठा कार्यक्रम “सांप दोस्त होते हैं“ का दूसरा संस्करण आयोजित किया। इस वर्ष “वन और संवहनीय शहर“ विश्व वन दिवस का थीम है। बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों और स्टेकहोल्डरों की उपस्थिति में श्री आनंद बिहारी, रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर, चाईबासा ने श्री आर पी माली, चीफ, नोआमुंडी आयरन माइन, टाटा स्टील और श्री प्रवीण धल, चीफ, प्रोसेसिंग ऐंड लॉजिस्टिक्स, (ओएमक्यू डिवीजन, टाटा स्टील) के साथ इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया। 

सभा को संबोधित करते हुए श्री बिहारी ने पश्चिम सिंहभूम में टाटा स्टील द्वारा उठाए गए अद्वितीय पहलकदमियों की सराहना की। उन्होंने सामुदायिक को लक्ष्य कर आयोजित किये जाने वाले कार्यक्रम ’सांप दोस्त होते हैं’, ‘जैव कला विविधता’, ‘प्रजातीय खाद्योत्सव’ आदि की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ये कार्यक्रम न केवल जैव विविधता पर लोगों को शिक्षित करते हैं और उनकी समझ बढ़ाने में मदद करते हैं, बल्कि जैव विविधता पर युवा बच्चों को भी संवेदनशीलता प्रदान करते हैं। यह प्रकृति ही है, जो जीवन के चक्र को चलाती है, इसलिए हम सभी को संतुलन बनाए रखने के लिए कुछ-न-कुछ अवश्य करना चाहिए।“

स्नेक हेल्पलाइन के संस्थापक व महासचिव सह मानद वन्यजीव वार्डन (खुर्दा, ओडिशा) तथा ‘स्नेक मैन ऑफ ओडिशा’ के नाम से लोकप्रिय श्री सुभेंदु मलिक ने साँप से संबंधित दिलचस्प तथ्यों व मिथकों को साझा किया और साँप के काटने के मामले में समुदाय को अस्पताल जाने की सलाह दी। श्री साजिद इदरीस, संरक्षण जीव-विज्ञानी, ‘इनटैक’, नयी दिल्ली ने विषय पर एक प्रस्तुतिकरण के माध्यम से पारिस्थितिकी तंत्र में सद्भाव बनाए रखने में मनुष्य की भूमिका पर प्रकाश डाला। 

कार्यक्रम के दौरान नवगठित वन सुरक्षा समिति के सदस्यों को इस क्षेत्र में उनके वन संरक्षण कार्यों के लिए टाटा स्टील द्वारा सम्मानित किया गया। अंत में लोगां ने बासुदेवपुर, ओडिशा के नृत्य समूह द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक ‘फुल्डोडांस’, बच्चों के लिए मैजिक शो, टाटा डीएवी, नोआमुंडी, टाटा डीएवी, जोडा और आरबीसी, जोडा ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत नृत्य व प्रहसन का आनंद उठाया। सुबह में जैव विविधता पर आयोजित ‘सिट ऐंड ड्रॉ’ प्रतियोगिता में लगभग 164 स्कूली बच्चों ने हिस्सा लिया। 

अंतिम सत्र में विजेताओं को मुख्य अतिथि द्वारा सम्मानित किया गया। इस मौके पर रोगों के इलाज में पारंपरिक दवाओं के उपयोग को प्रदर्शित करने के लिए स्थानीय वैद्यों (गांव के परंपरागत चिकित्सकों) द्वारा स्टाल भी लगाये ग