जाते जाते खजाना खाली कर गए दास, वेतन देने के पैसे नही

रघुवर का पाप : जाते जाते भी झारखंड का खजाना खाली कर गए रघुवर, दैनिक भास्कर के हवाले से खबर, चौकाने वाली है ट्रेजरी की ताजा रिपोर्ट, राज्य सरकार का खजाना खाली, वेतन देने तक के पैसे नहीं, उधारी में चल रहा है काम :

रघुवर राज का पाप बीजेपी का पीछा छोड़ने का नाम नहीं ले रहा है। जाते जाते भी रघुवर दास राज्य का खजाना साफ़ कर गए। राज्य में ट्रेजरी की स्थिति चाैंकाने वाली है। सरकार का खजाना खाली है। वेतन देने तक के पैसे नहीं हैं। उधारी में काम चल रहा है। इससे समय-समय पर ओवर ड्राफ्ट हाे जाता है। लाेन लेकर ओवर ड्राफ्ट काे कम किया जाता है। 19 दिसंबर काे राज्य के खजाने में सिर्फ 65 कराेड़ रुपए थे। केंद्र सरकार से 1800 कराेड़ रुपए का लाेन लेकर खजाने में 1925 कराेड़ रुपए जुटाए गए हैं। इन पैसाें से वेतन और पेंशन देने की काेशिश हाेगी। ट्रेजरी में भी कराेड़ाें के बिल पास नहीं हाे रहे हैं। नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनाैती खजाने काे पटरी पर लाना हाेगा।

राज्य बनने के प्रारंभिक चार सालाें तक सरप्लस बजट के कारण झारखंड की खास पहचान थी। लेकिन पिछले डेढ़ साल से वित्तीय स्थिति गड़बड़ा गई। महीने के 20 तारीख के बाद वित्त विभाग का पूरा महकमा सभी जरूरी भुगतान राेककर खजाने में पैसे जमा करने में जुट जाता है, ताकि कर्मचारियाें काे वेतन का भुगतान किया जा सके। सरकार ने ट्रेजरी से निकासी पर भी पराेक्ष रूप से राेक लगा रखी है। ट्रेजरी अफसराें काे निर्देश है कि वित्त विभाग के अफसराें की अनुमति के बगैर बड़े भुगतान की मंजूरी न दे। 

ऐसी स्थिति इसलिए :

अनुमान के अनुरूप राजस्व की प्राप्ति नहीं हाे रही है। सरकार अांतरिक संसाधन काे भी नहीं बढ़ा पा रही है। महिलाअाें काे एक रुपए के टाेकन मनी पर जमीन रजिस्ट्री का लाभ, शराब बिक्री की व्यवस्था बदलने अाैर जीएसटी लागू हाेने से भी वसूली प्रभावित हुई है। खनन लीज की बंदाेबस्ती न हाेने से भी स्थिति गड़बड़ाई है। चालू वित्तीय वर्ष के लिए 85 हजार करोड़ के बजट में राज्य को 72 हजार करोड़ अपने प्रयास से जुटाना था। केंद्र से 13 हजार करोड़ रुपए ही मिलने हैं। लेकिन सरकार 35 हजार कराेड़ ही जुटा पाई है।