खूँटी// श्रीमद् भागवत कथा का पांचवा दिन

 माखन चोरी अर्थात् चित्त की चोरी-स्वामी दिव्यानंद 

खूंटी(29दिस.) - लोबिन बगान डाक बांग्ला रोड में आर्ट ऑफ लिविंग परिवार द्वारा आयोजित भागवत के पंचम दिन पुज्य स्वामी दिव्यानंद जी ने कहा श्री कृष्ण रात को बारह बजे वसुदेव और देवकी जी के यहां प्रकट हुए जन्म लेते ही वसुदेव जी के हाथों की बेड़ियां स्वयं खुल गई और सैनिक सारे सो गए श्रीकृष्ण के प्रकट होते ही सारे बंधन स्वयं खुल गए, भगवान गोकुल में पधारे स्वामी जी ने बताया कि शुद्ध हृदय शुद्ध मन और ईश्वर में आस्था उनसे प्रेम हो तो ईश्वर उनके घर में जन्म लेते हैं अर्थात जो सांसारिक बंधन हैं उनसे मुक्ति और भीतर आनंद का जन्म होता है जब हमारा अंदर बहिर्मुख होता है यानी शरीर में आता है और इंद्रियां जब बहिर्मुख होती है यानी बाहरी चीजों में आकर्षित होती हैं तो पूतना राक्षसी आ जाती है पूतना यानी अज्ञान जब हम शरीर को ही सब कुछ मान लेते हैं यही अज्ञान है, शरीर भीतर भी एक सूक्ष्म शरीर है और उसके भीतर एक कारण शरीर जिसके कारण से स्थूल और सूक्ष्म शरीर है हम स्थुल को देख पाते हैं लेकिन सूक्ष्म को नहीं देख पाते सूक्ष्म शरीर को अनुभव करने के लिए हमें ध्यान साधना सुदर्शन क्रिया करने की आवश्यकता है श्रीकृष्ण ने माखन लीला कि स्वामी जी ने बताया माखनचोरी चित की चोरी है क्योंकि चित्त में ही मोह और माया है श्रीकृष्ण ने गोपियों के चित्र की चोरी कर उन्हें मोह माया से मुक्त  करते हुए स्वयं से एकमय  किया है, ईश्वर प्रेम स्वरूप है और हम से अगाध प्रेम करता है वैसे ही हमें ईश्वर से प्रेम करना चाहिए, गोपियां घर में रहते हुए भी माखन बेचने जाते हुए भी मन में कृष्ण को बसाए हुए थी वैसे ही वैसे ही हमें भी सांसारिक जीवन में रहते हुए ईश्वर स्थित रहना चाहिए, मुख्य यजमान कृष्णा भगत शीला भगत प्रमिला भगत राजेंद्र भगत ने मुख्य आरती विश्राम आरती की...आयोजन के विधि व्यवस्था में मुख्य रूप से प्रभा पाठक मोनिका धोन ज्योति शेखर संगीता राय पुष्पा तिवारी कल्याणी शाहदेव आशु रणेन्द्र शाहदेव सुब्रतो धोन मिनाक्षी सिन्हा राधा देवी शकुंतला भगत वीणा शर्मा ललिता भगत मनोरमा भगत आशुतोष भगत शामिल रहे....