पर्यावरणविद कौशल ने यूएन से किया पाक द्वारा सोन चिरैया को मारने के आदेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग


 पलामू विश्वव्यापी पर्यावरण संरक्षण अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पर्यावरण धर्म और वन राखी मूवमेंट के प्रणेता कौशल किशोर जायसवाल ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के उस आदेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग किया है जिसमें उसने विलुप्तप्राय 200 सोन चिरैया को दो करोड़ में मारने का आदेश बहरीन के राजा को दिया है। पर्यावरणविद ने पाक के उस आदेश पर रोक लगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ के अलावे भारत सरकार और वाइल्ड लाइफ को भी पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया है कि उनके द्वारा 42 वर्षों से चलाए जा रहे पर्यावरण धर्म के आठ मूलमंत्रों में छठा जानवर और सातवा मंत्र में पक्षियों को बचाने की प्रतिबद्धता शामिल है। पाकिस्तान द्वारा सोन चिरैया को मारने का जारी निर्देश से पर्यावरण धर्म पर बहुत बड़ा नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा है कि अगर संयुक्त राष्ट्र इसपर अविलंब पहल कर उन विलुप्तप्राय पक्षी की जीव की रक्षा नहीं किया तो आने वाले पीढ़ी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा । उन्होंने यह भी बताया कि जानवर में डायनासोर, और पक्षी में चील एवं गिद्ध इत्यादि विलुप्त हो रहे हैं। पर्यावरणविद कौशल ने कहा कि भारत सरकार सोन चिरैया की सुरक्षा पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। इतने खर्च के वावजूद भारत में सोन चिरैया की संख्या लगभग 175 के आंकड़े पर सिमट गई है। प्रकृति ने सोन चिरैया का पंख ढ़ी रंगों में सफेद और गोल्डन दिया है। जबकि उसकी ऊंचाई एक मीटर से अधिक और वजन लगभग 15 किलो तक होता है । भारत के राजस्थान, मध्य प्रदेश,गुजरात और पाकिस्तान के सिंध प्रांत में इसकी प्रजाति पाई जाती हैं। सोन चिरैया को पाक ने जमसोरों जिला समेत थाने बुला खान, कोटरी, मानछंद, और सेहवन तहसील में शिकार के अनुमति दी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2009 में उत्तराखंड के जिम कार्बेट नेशनल पार्क के एक बाघ को आदमखोर घोषित कर तत्कालीन कंजर्वेटर द्वारा उसे मारने का आदेश दिया गया था । लेकिन उनके पहल पर आदेश रद्द कराते हुए बाघ को कब्जे में लेकर चिड़िया घर में रखा गया था। लगातार घट रहे बाघों की संख्या को देखते हुए पर्यावरणविदों ने चिंता जताई थी। उस समय उन्होंने बाघ की रक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ एवं भारत सरकार समेत मेनिका गांधी को पत्र लिखकर गुहार लगाई थी। पर्यावरणविद कौशल ने पत्र में लिखा है कि मानवीय भूलों के कारण धरती के कई जीव समाप्त हो गए और कई समाप्ति के कगार पर हैं । धरती पर रहने वाले जीवो की 37 फीसदी और पानी में रहने वाले जीवो की 47 फीसदी प्रजातियां के अलावे 1147 प्रकार के मछलियों पर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। वावजूद हम प्रकृति के साथ विध्वंसक कार्रवाई करने से परहेज नहीं कर रहे हैं।