लातेहार: चार पुलिसकर्मियों की हत्या में शामिल सात नक्सली गिरफ्तार-लेवी के पांच लाख रूपये सहित अन्य आपतिजनक सामान बरामद

पलामू/लातेहार 6 जनवरी: नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में पलामू प्रमंडल के लातेहार पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है. लातेहार जिले में गत 22 नवम्बर को हुई चार पुलिसकर्मियों की हत्या में शामिल सात माओवादी नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है. उनके पास से लेवी के पांच लाख रूपये, 303 बोर की 40 राउंड गोलियां, आठ चार्जर, पुलिस का लूटा गया कपड़ा, घटना में इस्तेमाल की गयी तीन मोटरसाइकिलें सहित अन्य आपतिजनक सामान बरामद किये गए हैं.

गिरफ्तार नक्सलियों में कौन कौन 

पलामू रेंज के प्रभारी डीआईजी अमोल वी होमकर ने बताया कि गिरफ्तार नक्सलियों में भाकपा माओवादी के सबजोनल कमांडर रविन्द्र गंझू के सहयोगी लुकइया जामुनगढ़ा के बैजनाथ गंझू, हेसला के बांझीटोला निवासी कुंवर गंझू और राजेश गंझू, लुकइया के सुनील गंझू, फगुनी गंझू, संजय गंझू और नरेश गंझू शामिल हैं. 

क्या क्या मिला नक्सलियों के पास से 

उनके पास से चंदवा के ठेकेदार सोनू सिंह से वसूले गये पांच लाख रूपये, गोलियां, पुलिसकर्मियों के खून लगा कपड़ा, आधार कार्ड, एटीएम कार्ड, पासबुक, तीन मोटरसाइकिलें, पांच मोबाइल सेट, माओवादियों का हस्तलिखित पत्र बरामद किया गया है. 

लेवी वसूलने जाते पहले तीन पकड़े गए

डीआईजी ने बताया कि लुकइया की घटना के बाद टीम बनाकर कार्रवाई की जा रही थी. इसी बीच कल गुप्त सूचना मिली कि माओवादी सबजोनल कमांडर रविन्द्र गंझू के तीन सहयोगी मोटरसाइकिल जेएच01सीडब्लू 7773 से चंदवा में किसी ठिकेदार से लेवी वसूलने आने वाले हैं. सूचना पर चंदवा के पुलिस निरीक्षक सह थाना प्रभारी के नेतृत्व में छापमारी दल का गठन किया गया. 

निशानदेही पर चार अन्य पकड़े गए

इस दौरान पुलिस पार्टी जब सरोजनगर बुधबाजार स्थित शिव मंदिर के समीप पहुंची तो उक्त मोटरसाइकिल पर तीन सवार तेजी से जाते दिखे. उन्हें रोकने का प्रयास किया तो वे तेजी से भागने लगे. पुलिस द्वारा ओवरटेक कर उनकी मोटरसाइकिल रोकी गयी और उन्हें गिरफ्त में ले लिया. बाद में उनकी निशानदेही पर चार और नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया.  

खुद को बताया कि रविन्द्र गंझू का सहयोगी 

गिरफ्तार नक्सलियों से पुलिस ने पूछताछ की तो उन्होंने खुद को माओवादी सबजोनल कमांडर रविन्द्र गंझू का सहयोगी बताया और 22 नवम्बर को पुलिसकर्मियों पर हमला करने और उनकी हत्या करने की घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार की. नक्सलियों ने पूरी जानकारी देकर घटना को विस्तार से बताया. 

घटना में कौन कौन थे शामिल

गिरफ्तार नक्सलियों ने बताया कि इस घटना को रविन्द्र गंझू के दस्ते ने अंजाम दिया था. इसमें छोटू खरवार, मनीष, बलराम, विमल, मृत्युंजय, नवीन, अमन, चंदन, नीरज, प्रदीप, बुधेश्वर, मुनेश्वर, सुदर्शन, नंदकिशोर, मनोहर, संदीप, राजू, विशेष कोरवा, नागेन्द्र, नेशनल, कारू, सोनु कोरवा, सुखदेव बृजिया, सौरभ, चन्द्रभान, दिनेश नगेशिया, कमलेश आदि शामिल थे.

घटना में किसकी भूमिका कैसी रही थी

पूछताछ के दौरान गिरफ्तार नक्सलियों ने बताया कि 22 नवम्बर की घटना को लेकर प्लानिंग पहले से की गयी थी. घटना के दिन तीन लोग कुटनीतिक रूप से छुपाव के लिए लुकइया मोड़ की ओर पुलिस की आने जाने वाहनों पर मैन पैक (वाॅकी टाकी) से नजर रख रहे थे. जबकि रविन्द्र गंझू का अपने पांच हथियारबंद दस्ता के सदस्यों के साथ लुकइया मोड़ के पास शाॅल से हथियार छिपाकर घात लगाकर बैठा था. शेष लोग पुलिस के आने-जाने वाले रास्ते में घात लगाकर बैठे थे. रात 8 बजे जैसे ही पुलिस की पीसीआर वैन लुकइया मोड़ पर आकर रूकी, लक्ष्य कर अंधाधुंध फायरिंग की गयी. इसमें एक सहायक अवर निरीक्षक एवं तीन गृहरक्षकों की मौत हो गयी. घटना के दौरान नक्सली पुलिसकमियों के हथियार लूटकर फरार हो गए. पूर्व योजना के अनुसार बोदा मंडप के पास भी जमा हुए और वहां रविन्द्र गंझू ने सहयोग करने वाले गिरफ्तार नक्सलियों को पांच-पांच हजार रूपये दिया. उसके बाद ये लोग अपने अपने घर चले गए, जबकि हथियारबंद दस्ता वियरजंघा जंगल की ओर चला गया.