बैंक में अपने ही पैसे के लिए हो रही है मारामारी, कैसे होगी बेटियों की शादी ,एक सप्ताह से एटीएम बंद,दर दर भटक रहे हैं खाताधारी


पलामू जिले के हैदरनगर प्रखंड मुख्यालय में बैंकिंग सुविधा के नाम पर एकमात्र एसबीआई के अलावे वनांचल ग्रामीण बैंक की शाखा है। जिसमें 90 हजार से अधिक खाताधारक हैं। बैंक की स्थिति गत बर्ष नोटबंदी के बाद से अब तक उबर नहीं पाई। ग्राहकों को अपने जमा पैसे ससमय निकालने में दांत खट्टे करने पड़ रहे हैं। वर्तमान में शादी विवाह के मौसम में जरुरतमंदों को उपर्युक्त पैसे की निकासी नहीं हो पा रही है। लोग चिंता में हैं की उनकी बेटी बेटों की शादी कैसे होगी। सुबह होते ही हैदरनगर की भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में ग्राहकों की भीड़ जमा हो जाती है। वह इस विष्वास में खड़े रहते हैं कि आज उन्हें पैसा मिल जायेगा। मगर जैसे जैसे समय बीतता है। उन्हें निराषा होने लगती है। बैंक में प्रवेश के लिए लोहे की चैनल से अंदर घुसने के लिए सिर फुटौव्वल आम बात हो गई है। ग्राहक संतोष उपाध्याय, सत्येन्द्र राम, रामप्रवेश प्रजापति, बाबूलाल पासवान, संतोष सिंह, कामेष्वर सिंह, खलील अंसारी सहित कई अन्य ने बताया कि उन्हें पैसे की षख्त जरुरत है। किसी के घर षादी है, तो किसी को न्योता मानने जाना है। प9ैसा नहीं मिल रहा है। वह करें तो क्या करे। दूसरी ओर बैंक से जरुरतमंदों को नगद राशि नहीं मिलने से बाजार में भी सन्नाटा देखा जा रहा है। नोटबंदी व बाजार मंदी की मार व्यवसायी भी झेल रहे हैं। बीडीओ शैलेंद्र कुमार रजक ने बताया कि इससे विकास कार्य पर भी असर पड़ रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना व षौचालय निर्माण योजना के लाभूकों को बैंक से पैसा नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने इस संबध में बीएम सहित बैंक के उच्चाधिकारियों से बात की। पैसे के अभाव में एटीएम के ताले भी एक सप्ताह से लटके पड़े हैं। नतीजतन बुधवार को घंटों लाईन में रहे प्रति ग्राहकों को निकासी के नाम पर 10-10 हजार रुपये दिये गये।

                - संकीर्ण स्थान में है बैंक की शाखा

   एक ओर पैसे की मार बैंकों के ग्राहक झेल रहे हैं, तो दूसरी ओर संकीर्ण स्थान पर अवस्थित एसबीआई परिसर में पानी, शौचालय, पार्किंग का घोर अभाव है। ग्राहक व उनके वाहन से शहर के बैंक रोड व जवाहर पथ पूरी तरह जाम हो जाते हैं। जिससे लोगों को पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है। मुख्य सड़क पर दो पहिया व अन्य वाहनों को बेखौफ खड़े कर बैकिंग कार्य निपटाना ग्राहकों की विवशता  है। इस जाम से निपटना पुलिस प्रशासन के बूते से बाहर है।

 

      

-शाखा प्रबंधक कैरा पूर्ति ने बताया कि आरबीआई के पत्रांक 2758 दिनांक 17 अप्रैल 2018 द्वारा बैंकों को पत्र जारी कर बताया गया कि उनके पास पैसा व करेंसी का कोई अभाव नहीं है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के हुसैनाबाद एसबीआई चेस द्वारा डेढ़ सौ करोड़ रुपये की डिमांड आरबीआई से की गई थी। किन्तु मात्र 13 करोड़ राशि ही उपलब्ध कराई गई। उन्होंने कहा कि मात्र पत्र देकर आरबीआई ने कैश के अभाव से अपना पल्ला झाड़ लिया है। इस परिस्थिति में बैंक के ग्राहकों को 10 - 20 हजार तक पेमेंट करना विवशता है। पैसा नहीं रहने से नियमित एटीएम खोलना भी मुश्किल है। वहीं एसबीआई परिसर स्थित जाम के सवाल पर कहा कि अन्यत्र शाखा स्थानांतरण के लिए उच्च स्तर पर पहल की गई थी। अग्रेतर कार्रवाइ्र की जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि हैदरनगर एसबीआइ की षाखा में जमा के अनुपात में निकाषी अधिक है। उन्होंने कहा कि जमा के अनुपात में दस गुणा निकाषी होती है। जबतक बाहर से राषि प्राप्त नहीं होगी स्थिति सामान्य नहीं हो सकती।

         - क्यों होती है जमा से अधिक निकाशी

जनकारों का मानना है कि हैदरनगर इलाके में कोई उद्योग धंधा या आय के अन्य साधन नहीं हैं। अधिकाष लोग विदेशी या देश के अन्य जगहों पर मेहनत मजदूरी या रोजगार करते हैं। उनके द्वारा अपने परिवार के लोगों को जो राशि खाते में डाली जाती है। उसे यहां निकाषी होना स्वभाविक है। जानकारों का यह भी मानना है कि जीएसटी के झंझट से बचने के लिए अधिकांश लोगों ने नगद कारोबार शुरु कर दिया है। बड़े दुकानदार ही अब बैंकों पर निर्भर हैं। यह भी एक वजह है कि हैदरनगर क्षेत्र का नगद अन्य बड़े शहरों में चला जाता है। जिससे स्थानीय स्तर पर नगद की समस्या से लोगों को जुझना पड़ रहा है।