खूँटी//नई नागरिकता संशोधन कानून पर जन जागरण हेतु किया गया संगोष्ठी

सी.ए.ए. नागरिकता देने के लिए है ना कि नागरिकता छीनने के लिए - क्षेत्रीय प्रचारक

खूँटी : भारत का धर्मनिरपेक्ष कानून सभी नागरिकों के लिए बनी है ‌। चाहे वह किसी भी जाति या संप्रदाय के  हों। 8 अप्रैल 1950 ईस्वी में भारत के कानून एवं संविधान के लिए नेहरू लियाकत संधि समझौता पाकिस्तान और भारत के बीच हुआ था । जिसमें दोनों देशों के बीच जहां अल्पसंख्यक होंगे वहां अल्पसंख्यक की हिफाजत संरक्षण सम्मानजनक जीवन और स्वतंत्रता पूर्ण जीवन व्यतीत करने का स्वतंत्रता देंगे । और यह पारित हुआ। और इस तहत भारत में अल्पसंख्यकों को पूरी आजादी मिली । लेकिन पाकिस्तान और बांग्लादेश में इसकी आजादी नहीं दी गई , यह उस देश के जनसंख्या के गिरावट से पता चलता है। यह बात नागरिकता संशोधन अधिनियम एवं देश की वर्तमान परिस्थिति पर राष्ट्रीय संवर्धन समिति खूंटी द्वारा संगोष्ठी कार्यक्रम में राष्ट्रीय संघ सेवक संघ के क्षेत्रीय प्रचारक रामदत्त चक्रधर ने कही ।   

        कार्यक्रम का उद्घाटन खूंटी के राजस्थान भवन में बतौर मुख्य अतिथि श्री चक्रधर पदम श्री पूर्व लोकसभा उपाध्यक्ष कड़िया मुंडा, विभाग सहसंघचालक विवेक  भसीन ने संयुक्त रूप में दीप प्रज्वलित करके की ।

भारत में धर्म और संप्रदाय के नाम पर किसी अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित नहीं किया जाता

             श्री चक्रधर ने कहा कि यह नागरिकता संशोधन विधेयक भारत पाकिस्तान एवं बांग्लादेश अल्पसंख्यकों को आत्मसात करने का प्रावधान है यह समझौता 8 अप्रैल 1950 ईस्वी में नेहरू लियाकत संधि समझौता तय हुआ था । जो देश का कानून  और संविधान में उल्लिखित है । इसमें कोई नया नहीं किया गया है ‌। परंतु उनको इस देश में जगह मिलेगी जिन्हें धर्म संप्रदाय के नाम पर उस मुस्लिम राष्ट्र में प्रताड़ित किया जा रहा हो, और जो यहां आना चाहता हो । परंतु उसे नहीं जो यह व्यवसाय के लिए आगे और आना-जाना करते रहे। या हिंदुस्तान की परंपरा रही है स्वामी विवेकानंद की बात को रखते हुए कहा कि राष्ट्र गौरव हेतु स्वामी विवेकानंद ने शरण देने की बात की थी जो 1942 ईस्वी में कांग्रेस ने अखंड हिंदुस्तान का प्रस्ताव पारित किया था जिसमें 1930 ईस्वी में रावी नदी के तट पर लोगों ने कसम खाकर 1942 में यह प्रस्ताव पारित किया था लेकिन जब 3 जून 1947 ईस्वी में बैठक करके कांग्रेस ने संवाददाताओं के बीच नेहरू जी के नेतृत्व में तो उन्होंने अखंड भारत की बात को नकार दिया और इसमें जो राष्ट्र के रूप में खंडित कर देने का बात लाया गया जिसमें पाकिस्तान और दूसरा भारत की बात की घोषणा की । और जब पाकिस्तान बना तो वहां रह रहे दस लाख हिन्दूओं  की हत्या और ढाई करोड़ हिंदू विस्थापित पाकिस्तान से हुए थे । और आज पाकिस्तान में 1.2% जनसंख्या हिंदू की रह गई है। जहां कानून का उल्लंघन करके अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करते हुए इस्लाम कबूल करवाया जा रहा है। यह बात खूंटी के राजस्थान भवन में संगोष्ठी के आयोजन में अपने उद्बोधन में रामदत्त ने कही।

          इस कार्यक्रम में आर एस एस के विभाग सहसंघचालक विवेक भसीन, पदम श्री कड़िया मुंडा, जिला संघचालक मदन मोहन गुप्ता, नगर संघचालक सुरेश मिश्रा,  सांसद प्रतिनिधि मनोज जायसवाल, विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा, मदन मोहन मिश्रा, सुनील साहू , जितेंद्र कश्यप, काशीनाथ महतो, संजय साहू ,विनोद जायसवाल, भीम सिंह मुंडा तथा विविध संगठनों के अनेक लोग, सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ता  और विद्यार्थी परिषद के साथ सैकड़ों प्रबुद्ध जन आम नागरिक इस कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।