खूँटी// क्षेत्र में नदी के तट पर मना धूमधाम से मकर संक्रांति पर्व

क्षेत्र में धूमधाम से नदी तटों पर मना मकर संक्रांति पर्व 

खूँटी (15 जन.) : मकर संक्रांति उत्सव के उपलक्ष्य में पारंपरिक रूप में लोगों ने अपने घरों में पर्व मनाया। साथ ही लोगों के घरों में बिल्कुल दूध, दही, चूड़ा, गुड़ आदि के साथ मिलकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किए। सूरज कुमार ने जिले के वासियों को  मकर संक्रांति और लोहड़ी की बधाईयां दी । इधर, पद्मश्री कड़िया मुंडा ने सभी को टुसू पर्व और मकर संक्रांति की बधाइयां और शुभकामना दिए ।

       कुंजला ग्राम स्थित केशव माधव बाल आश्रम में बच्चों के बीच तिलकुट, गुड चूड़ा, दही आदि के साथ सर्वांगीण ग्राम विकास संस्था के डॉ निर्मल सिंह के अगुवाई पर मकर संक्रांति उत्सव मनाया गया । जहां अनाथ बच्चों के साथ बैठकर परिवारों के साथ तिल गुड़ चुडा आदि के साथ प्रसाद पाकर लोगों ने खुशी-खुशी मकर संक्रांति उत्सव मनाए । उन्होंने कहा कि खुशियां केवल अपने हृदय में अपने स्वार्थ मात्र के लिए नहीं रखनी चाहिए बल्कि दूसरों को खुश देखकर और सुख देकर अपनी खुशियां निर्वहन करना ही सच्चा सुख और खुशी है।

        इस अवसर पर खूंटी रांची मार्ग में तजना नदी में  गायत्री परिवार द्वारा मकर संक्रांति उत्सव मनाया गया। इस अवसर पर यज्ञ हवन आदि कर दरिद्र नारायण भोग के रूप में खिचड़ी का भोग लगाकर के लोगों के बीच  वितरण किया गया । साथ ही, लोग अपने घरों से तिलकुट, लड़ुवा, चूड़ा,दही आदि लाए थे जिसे स्नान करके आपस में वितरण कर प्रसाद के रूप में बांटा गया तथा लोगों ने वनभोज के रूप में आनंद उठाया। बता दें कि-  इस तजना नदी में दरिद्र नारायण भोज के कार्यक्रम का शुरुआत 1953 ईस्वी में तत्कालिन गायत्री परिवार के साधक दिवंगत डॉ. देवेंद्र नाथ साहू ने करवाया था।

       इधर, खुटार के नजदीक रंगरोड़ी धार्मिक स्थल सह पर्यटन स्थल में इस अवसर पर प्रत्येक वर्ष की भांति मेला लगा जिसमें क्षेत्र के हजारों लोग टुुसू मेले के रूप में रंगोली धाम का आनंद उठाया। यहां टुसू (चौड़ल) लोगों के द्वारा बनाकर ले जाया गया था। ‌ जहां नदी के बीच में शिवलिंग पर लोगों ने श्रद्धा पूर्वक स्नान ध्यान करके तिलकूट,चूड़ा  गुड आदि अर्पण किए। इसके पूर्व पाहन के द्वारा पूजा करके लोगों को यहां का प्रसाद मिला। साथ ही साथ मेले में नाना प्रकार के दुकानें लगी थी  जहां ईख, मुरही लडुआ, बैलून, गुलगुला आदि की बिक्री प्रचलित रही ।