पूरे जिले में सौर्य ऊर्जा आधारित पेयजल की हो रही है व्यवस्था

पूरे जिले में सौर्य ऊर्जा आधारित पेयजल की हो रही है व्यवस्था 

खूँटी(22जन.): जिला पेयजल आज एक बड़ी समस्या बन चुकी है। चाहे गाँव हो या नगर, हर जगह लोगों के लिए पेयजल की कमी महसूस की जा रही है। इसी मद्येनजर जिला प्रशासन के द्वारा गाँव में सड़क और बिजली के साथ पेयजल की सुविधा पहुँचाने हेतु सौर ऊर्जा से चलने वाला जलमीनार की योजना बनाई गई। विशेष केन्द्रीय सहायता मद से खूँटी जिला  के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल हेतु सोलर आधारित लघु ग्रामीण पेयजलापूर्ति योजना का क्रियान्वयन कराया गया है। इस योजना में 01 एचवाईडीटी ड्रील ट्यूबवेल में 2 हाॅर्स पवार का सौर ऊर्जा से चलने वाला मोटर डाला गया है तथा 04 पीलर पर 8000 लीटर का पानी टंकी एवं पैनल रखा गया है। इस योजना से उस ग्राम के घरो में पाईप आधारित जलापूर्ति की जा रही है।

       इसी क्रम में विशेष केन्द्रीय सहायता मद से अड़की प्रखण्ड अन्तर्गत सोसोकुटी पंचायत के सोनपुर पूरब टोला एवं पश्चिम टोला में सोलर आधारित लघु ग्रामीण पेयजलापूर्ति योजना से घर-घर पीने का पानी पहुँचाया जा रहा है। इस योजना से उक्त ग्रामों के 90 घरों में पाईप आधारित पेयजलापूर्ति की जा रही है।

       सोनपुर ग्राम के पूरब टोला के ग्रामीण कहते हैं कि पानी की समस्या क्या होती है, जो झेलता है, वही जानता है। पहले हमें पीने का पानी लाने के लिए काफी दूर जाना पड़ता था। महिलाओं को काफी समय लगता था। उनके साथ बच्चे जाते थे। इससे पढ़ाई की क्षति तो होती ही थी। साथ ही कई तरह के स्वास्थ्य समस्याएँ भी होती थीं। जिला प्रशासन के द्वारा सोलर आधारित लघु ग्रामीण पेयजलापूर्ति योजना के माध्यम् से घरों में पाईप आधारित पेयजलापूर्ति की जा रही है। इससे गाँव में प्रसन्नता का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि जिला प्रशासन के द्वारा पीने का पानी के लिए स्थायी व्यवस्था कर दी गई है। इसके लिए बिजली की जरूरत नहीं है। सोलर एनर्जी से काम हो जाता है। अब हमें पानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

           सोनपुर पश्चिम टोला के ग्रामीणों का कहना है कि पानी के लिए हमने अपने परिवार को काफी संघर्ष करते हुए देखा है। गाँव से दूर चुआँ से या नदी से पीने के लिए पानी लाना पड़ता था। सुबह से ही लोग वहाँ जमा हो जाते थें। खेत पर जाने से पहले सबके लिए पहला काम पानी लाना होता था। साफ पानी की कमी से कई तरह की बीमारियाँ होती थीं। कुपोषण से बच्चे पीड़ित रहते थे। सौर ऊर्जा आधारित जलमीनार बनने के बाद हालात बदल रहे हैं। हमें शुद्ध पेयजल मिल रहा है। पानी की कीमत हम जानते हैं। सोलर आधारित लघु ग्रामीण पेयजलापूर्ति योजना से घर-घर पीने का पानी पहुँचाया जा रहा है, जिससे पीने का पानी के लिए अब हमें नहीं भटकना पड़ेगा। 

      जिला प्रशासन के द्वारा पेयजल की समस्या को देखते हुए सौर ऊर्जा आधारित जलमीनार के लिए सिर्फ टोलों को ही नहीं चुना गया, बल्कि स्कूलों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों एवं आँगनबाड़ी केन्द्रों में भी पेयजलापूर्ति हेतु सौर ऊर्जा आधारित जलमीनार बनाये जाने का कार्य किया जा रहा है। पेयजल की जरूरत हर जगह होती है। जितनी जरूरत घर में होती है, उतनी ही जरूरत सार्वजनिक स्थलों पर होती है। स्कूलों में बच्चों के लिए तो चिकित्सा कन्द्रों में मरीजों और उनके परिजनों को जरूरत होती है। पीने का पानी के लिए उन्हें भटकना पड़ता है या बाहर से खरीदना पड़ता है, परन्तु अब ऐसी बात नहीं है। पेयजल की समस्या दूर हो रही है। पेयजल के लिए सौर ऊर्जा आधारित जलमीनार का निर्माण किया गया है, जिससे पारंपरिक बिजली पर निर्भरता नहीं रहती है। अब लोगों को आसानी से पीने का पानी मिल रहा है। राह चलते सड़क किनारे सोलर जलमीनार से लोगों को पानी लेते देखा जा सकता है। कल तक जो पेयजल को लकर सवाल कर रहे थे, वे अब नगर से लेकर सुदूर गाँव तक टोलों में उपलब्ध सौर ऊर्जा आधारित जलमीनार की सराहना कर रहे हैं। आज सुदूर गाँवों में भी पेयजल मिल रहा है।