खूंटी/तमाड़//दिवड़ी मंदिर में गणतंत्र दिवस पर नहीं होता है बलि, मंदिर परिसर में नहीं लगते हैं किसी के दुुुुुकानों में ताले

 दिवड़ी मंदिर में गणतंत्र दिवस पर नहीं होता है बलि, मंदिर परिसर में नहीं लगते हैं किसी के दुुुुुकानों  में ताले

मंदिर के निर्माण काल का किसी को नहीं है पता, आस्था और विश्वास के साथ जाए तो होती है मन्नते पूरा

 ब्रजेश कुमार

खूँटी (27जन.) : आज गणतंत्र दिवस के दूसरे दिन तमाड़ प्रखंड स्थित माँ दिवड़ी मंदिर में अच्छा खासा भीड़ दिखाई दिया।  चिरंतन काल से यह मंदिर साक्षात् मां दुर्गा का रूप विराजमान है । यहाँ प्रत्येक दिन परंपरागत ढंग से पूजा अर्चना युगों से होती आई है । यह मंदिर कब का है यह किसी को पता नहीं है । जहांँ प्रत्येक देवी मंदिर में बलि प्रथा चलती आई है परंतु यह एक ऐसा उदाहरण है जहांँ बलि प्रथा होने के बावजूद राष्ट्र भाव भी दिखाई देता है । 

     समाचार लिखे जाने का यही खास वजह भी है कि जहांँ  लगभग प्रत्येक देवी मंदिरों में लगभग बलि प्रथा होती है । लेकिन इसके बावजूद भी ड्यूटी मंदिर में कुछ खास अवसरों पर बलि प्रथा रोक दी जाती है । यह अवसर गणतंत्र दिवस 26 जनवरी के दिन स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त के दिन 2 अक्टूबर गांधी जयंती के दिन और नवरात्रि के 9 दिन बलि नहीं दी जाती है ।  नवरात्र अष्टमी उपवास के बाद ही यहांँ संधि बलि के साथ पुनः बलि प्रथा प्रारंभ होती है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यह मुगल काल से भी पूर्व किसी राजा के स्वप्न में आया और दूसरे दिन यह मंदिर स्वनिर्मित पाया गया। यह  स्वत: मांँ का अवतरित रूप  के रूप में  जाना जाता है । स्वत: निर्मित मंदिर को लोग देखकर  अचंभित रह गए और लोगों ने यहां पूजा अर्चना करने प्रारंभ कर दिए की यहां सच्चे भाव से पूजा अर्चना करने पर लोगों की मन्नतें पूरी होती है और हमेशा यहां ऐसा देखने को मिलता ही है यही कारण है कि धीरे-धीरे लोगों की भीड़ आस्था का भाव और श्रद्धा का जागरण साक्षात रूप में दिखाई पड़ता है लोग यहां आते हैं मन्नतें मांगते हैं इच्छाएं पूरी होती है जो भी व्यक्ति ईमानदारी सच्चाई और विश्वास के साथ मां भगवती के चरणों पर अपना माथा नवाते हैं उनकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है। 

         रांची जमशेदपुर सड़क पर nh-33 परिस्थितियांँ प्राचीन मंदिर मैं पूजा अर्चना कर अपने आप को धन्य मानते हैं इस क्षेत्र के ही लोग भी मात्र नहीं बल्कि सुप्रसिद्ध क्रिकेट खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी भी यहां आकर श्रद्धा पूर्वक पूजा अर्चना करते हैं सिने तारिका नायक नायिका और अनेक सुप्रसिद्ध व्यक्ति ही यहां पूजा करने के लिए आते हैं।  यह क्षेत्र गरीब ग्रामीणों का क्षेत्र रहा है ।  परंतु इसके बावजूद भी सनातनी अध्यात्म पर श्रद्धा और अटूट विश्वास के लोगों का इस क्षेत्र में निवास है ।  मांँ भगवती की कृपा से यहाँ के लोगों का इस क्षेत्र में सच्चाई और ईमानदारी से अपना रोजगार चलाते हैं ।  

मंदिर परिसर में नहीं लगते हैं किसी के दुकानों में ताले

     बता दें कि दिवड़ी मंदिर परिसर में किसी के दुकानों में ताले नहीं लगते हैं ।  लोग अपने झोपड़ पट्टियों में दुकान लगाकर रात भर छोड़ भी देते हैं, लेकिन यहां किसी प्रकार की कोई चोरी या डकैती नहीं होती है ।  ऐसा सच्चाई सत्यता और विश्वास पर मांँ की कृपा हमेशा बनी रहती है ।  इसीलिए इस परिसर के अंदर किसी घरों में या दुकानों में ताले नहीं लगते हैं । मांँ की कृपा से दुकानें लगाकर अपने जिविकोपार्जन का साधन के रूप में भी यहां पर रह रहे हैं। जहां पर्यटक और आगंतुक आते हैं, जिन्हें पूरी श्रद्धा के साथ दुकानदार उनकी सेवा और सहयोग करते हैं। 

        यहाँ स्वच्छता और व्यवस्था के नाम पर भी लोग हमेशा सजग रहते हैं।  आज बकरे की बलि देने वालों का भीड़ होने का यही कारण रहा कि कल गणतंत्र दिवस  26 जनवरी को राष्ट्र पर्व के रूप में लोगों ने बलि प्रथा बलि करने का नियम नहीं रहता है। जिन्हें बली नहीं देनी होती है वैसे लोगों का भीड़ छुट्टी होने के बावजूद भी 26 जनवरी को लोग पूजा अर्चना करने आए थे।  बली पर रुकावट होने के बावजूद भी 26 जनवरी को माँ के दरबार में भीड़ अच्छा खासा भीड़ रहा।