खूँटी//तंबाकू नियंत्रण कानूनों के प्रभावी प्रवर्तन के लिए तंबाकू विरोधी दस्ते का किया गया प्रशिक्षण कार्यक्रम

तंबाकू नियंत्रण कानूनों के प्रभावी प्रवर्तन के लिए तंबाकू विरोधी दस्ते का प्रशिक्षण कार्यक्रम 

खूँटी(28जन.)': जिला तम्बाकू नियंत्रण कोषांग खूंटी के तत्वावधान में सोसियो इकनाॅमिक एंड एडुकेशनल डेवलाॅपमेंट सोसाइटी (सीड्स), झारखंड के सहयोग से समाहरणालय सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता अपर समाहर्ता, खूंटी श्री अरविंद कुमार ने की। 

इस कार्यशाला में नशा उन्मूलन के लिए अनेक प्रावधान बनाए गए । इसमें-

तम्बाकू नियंत्रण कानून (कोटपा 2003) के उल्लंघन करने वालों पर होगी दण्डात्मक करवाई 

सभी सरकारी संस्थान होंगे तम्बाकू मुक्त परिसर, किसी भी कर्मियों के तम्बाकु सेवन करने पर लगेगा जुर्माना। 

तंबाकू उत्पाद के निर्माता, थोक एवं खुदरा विक्रेता नहीं बेच सकेंगे बिना बोर्ड के तम्बाकू उत्पाद। शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे से हटाया जाएगा तम्बाकू उत्पादों का दुकान ।

       मौके पर अपर समाहर्ता द्वारा जिले में तंबाकू नियंत्रण हेतु संबंधित अधिकारियों को कोटपा-2003 के प्रावधानों के अनुरूप सिगरेट व अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री नहीं करनेवाले विक्रताओ के विरूद्ध सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने संबंधित पदाधिकारी को निर्देश दिया कि स्कूलों में इस कार्यक्रम का संचालन किया जाय और सभी शिक्षण संस्थानों के पास से तम्बाकू उत्पाद की दुकानों को यथाशीघ्र हटाया जाए। इस आदेश के उलंघनकर्ताओं को COTPA, JJ Act सहित विभिन्न धाराओं में दंडित किया जाएगा। अपर जिलाधिकारी महोदय ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को अपने अपने कार्यक्षेत्रों में कोटपा 2003 के विभिन्न धराओं का शत प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

कार्यशाला में लाईसेंसिंग एवं तम्बाकू नियंत्रण हेतु निर्गत आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु आदेशों के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई। मौके पर अपर समाहर्ता द्वारा बताया गया कि तंबाकू स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इससे मानव स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। व्यक्ति गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो जाता है, इसलिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा संचालित तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम कोटपा 2003 के विभिन्न धाराओं के अनुसार जिला स्तरीय छापामार दस्ते का गठन किया गया है। यह दस्ता उत्पाद विक्रय स्थलों की मॉनिटरिंग कर उल्लंघनकर्ता पर नियम अनुसार चालान व जुर्माना (रु 200/- तक) की कार्रवाई सुनिश्चित कर सकते है। साथ ही बताया गया कि संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी अपने-अपने कार्य क्षेत्र में स्थापित छापामार दस्ते के द्वारा प्रत्येक सप्ताह में कम से कम एक बार छापामारी की प्रक्रिया को क्रियान्वित करेंगे।

इसके साथ ही बताया गया कि काई भी दुकानदार तम्बाकू उत्पाद के साथ अन्य उत्पाद नहीं बेच सकता है। लाईसेंस प्राप्त दुकानदार फुड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट का अनुपालन सुनिश्चित करेंगे। कोटपा- 2003 के सभी प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करेंगे। साथ ही बाल संरक्षण अधिनियम-2015 का अनुपालन सुंनिश्चित करना है। ऐसा नहीं करने वाले अथवा झारखंड नगरपालिका अधिनियम एवं अन्य संबंधित कानूनों का उल्लघंन करने वाले व्यक्तियों से नियमानुसार जुर्माना वसूल की जाएगी।

   प्राशिक्षण के दौरान SEEDS के निदेशक श्री दीपक कुमार मिश्रा द्वारा पीपीटी प्रेजेंटेशन दिखाकर बताया गया कि तंबाकू का सेवन जन स्वास्थ्य के लिए खतरा है।

उन्होंने NTCP और COTPA के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बताया गया कि तंबाकू का सेवन गैर संचारी रोगों से जुड़े जोखिम का प्रमुख कारण है। उन्होंने बताया कि भारत में कैंसर से मरने वाले 100 रोगियों में से 40 तंबाकू के सेवन करने पर मरते हैं। लगभग 90% मुंह के कैंसर तंबाकू सेवन करने वाली व्यक्तियों में होते हैं। अभिघात, हार्ट-अटैक, फेफड़े के रोग, दृष्टिविहीनता एवं कुछ अन्य गंभीर रोग तंबाकू के सेवन के कारण होते हैं। इसी क्रम में बताया गया कि भारत में प्रतिवर्ष 10 लाख में से अधिक लोगों की मौत तंबाकू सेवन के कारण होने वाली बीमारियों से हो रही है। भारतीय संसद में 2003, में युवाओं और आम जनमानस को तंबाकू सेवन के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए कोर्ट का अधिनियम 2003 को लागू किया है। साथ ही बताया गया कि बच्चों और अवयस्कों को तम्बाकू उत्पाद बेचने पर लगेगा 1 लाख तक का जुर्माना और होगी 7 साल तक की सजा।

कोटपा की धारा 4 के अंतर्गत सभी सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान पर प्रतिबंध है। प्रतिबंधित स्थलों पर धूम्रपान निषेध का उल्लंघन करने पर ₹200 तक का जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है।

साथ ही सभी सरकारी कार्यालय, संस्थान, शिक्षण संस्थान आदि परिसर में किसी भी प्रकार का तंबाकू पदार्थ यथा सिगरेट, बीड़ी, खैनी, गुटखा, पान मसाला, जर्दा इत्यादि का उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित है। 

विदित हो कि हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संघठन और भारत सरकार द्वारा प्रकाशित GATS 2 के सर्वे में झारखंड में तम्बाकू सेवन करने वालों में कमी आई है, यह आंकड़ा 50.1% से घट कर 38.9% हो गई है।

तम्बाकू नियंत्रण से संबंधित जागरूकता आवश्यक- सिविल सर्जन 

        मौके पर सिविल सर्जन श्री प्रभात कुमार द्वारा बताया गया कि प्रखंड कार्यालयों, सदर अस्पताल, सामंदायिक स्वास्थ्य केंद्रों- उपकेंद्रों सहित अन्य सार्वजनिक जगहों पर सिगरेट व अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध से संबंधित बैनर व पोस्टर कराना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। साथ ही जिले में सिगरेट व अन्य तंबाकू उत्पादों की विक्री करने वाले दुकानदारों के मध्य कोटपा-2003 के सभी प्रावधानों का प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए। कोटपा-2003 के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों को नोटिस दिया जाना चाहिए। तत्पश्चात छापामारी कर कोटपा के सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।  

        मौके पर श्री रिम्पल झा कार्यक्रम समन्वयक ने प्रस्तुतिकरण के माध्यम से तम्बाकू नियंत्रण की आवश्यकता पर बल दिया और खूंटी में अब तक किये गए गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होने तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम में सभी हितधारकों को अपनी भूमिका निभाने का सुझाव दिया।