झारखंड राज्य साक्षरता कर्मचारी संघ का शिष्टमंडल मुख्य मंत्री से मिला, चार सूत्री मांग पत्र सौंपा

रांचीःझारखंड राज्य साक्षरता कर्मचारी संघ का शिष्टमंडल प्रदेश अध्यक्ष संजय कुमार के नेतृत्व में मुख्य मंत्री हेमंत सोरेन से मिला। साक्षरता कर्मियों की समस्याओं से संबंधित चार सूत्री मांग पत्र सौंपा। मांग पत्र में कहा गया है कि साक्षरता कर्मियों की नियुक्ति विज्ञापन के आधार पर वर्ष 2010 में प्रखंड स्तर पर भारत मिशन के तहत पंचायत स्तर पर एक महिला व एक पुरुष ,प्रखंड स्तर पर एक बीपीएम तथा जिला स्तर पर एक लेखा पाल, एक डीपीसी व डीपीएम की गई थी। इस नियुक्ति के आधार पर पंचायत स्तर पर नियुक्त कर्मी को 2000 प्रखंड स्तर पर बीपीएम को 6000 व जिला स्तर पर नियुक्त कर्मियों को 8000 रुपया न्युंतम मजदूरी का भुगतान किया जाता है। न्युंतम मानदेय पर भी साक्षरता कर्मी लोगों को साक्षर करते आ रहे है। साथ ही सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं यथा आर्थिक गणना, प्रधान मंत्री जनधन खाता खुलवाना, स्कूल चले अभियान के अलावा पारा शिक्षकों की हड़ताल अवधि में विद्यालयों में पठन पाठन का भी कार्य साक्षरता कर्मी द्वारा किया जाता रहा है। इसके अलावा मतदाता जागरुकता ,स्वच्छ भारत अभियान एवं कुष्ठ उन्मूलन जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी साक्षरता कर्मियों द्वारा निरंतर किया जा रहा है। परंतु विगत 31 मार्च 2018 से सरकार ने साक्षर भारत मिशन को स्थगित कर दिया है। जिससे झारखंड प्रदेश में लगभग 10 हजार साक्षरता कर्मी बेरोजगारी का दंष झेलते हुए भुखमरी के कगार पर पहुंच गये हैं। मांग पत्र में कहा गया है कि झारखंड के साक्षरता कर्मियों का 20 माह से लेकर 32 माह तक का मानदेय लंबित है। आष्चर्य की बात तो यह है कि उच्चाधिकारियों द्वारा नई शिक्षा नीति के तहत साक्षरता कर्मियों को समायोजित करने की बात कही जा रही है। किंतु इस दिषा में कोई सार्थक प्रयास नहीं किया जा रहा है। समझा जा सकता है कि नौकरी की उम्र सीमा समाप्त हो जाने के बाद साक्षरता कर्मियों के पास जीविकोपार्जन का कोई अन्य विकल्प नहीं रह गया है। संघ ने साक्षरता कर्मियों का बकाया मानदेय का भुगतान अविलंब करने, साक्षरता कर्मियों का किसी अन्य सरकारी विभागों में समायोजन करने, न्युंतम मजदूरी के आधार पर मानदेय भत्ता का निर्धारण करने व षिक्षा विभाग में रिक्त पड़े पदों पर वरीयता के आधार पर नियुक्ति करने की मांग मुख्यमंत्री से की है। देखना यह है कि इनकी मांगों पर मुख्यमंत्री क्या कार्रवाई करते हैं। शिष्टमंडल में विश्वनाथ रवानी, मुकेश कुमार, जनार्दन भगत, गौतम कुमार महतो, रेखा, जयदेव राम आदि शामिल थे।