खूंटी जिले का एक पर्यटक स्थल ; उलीहातू

उलिहातु (भगवान बिरसा मुंडा का पैतृक गांव)

खूंटी(1फर) : खूंटी जिला के अड़की प्रखंड अंतर्गत चतुर्दिक वनाच्छादित पहाड़ी इलाके के बीच अवस्थित है-ऐतिहासिक गांव उलिहातु। यह वही गांव है, जहां के रहने वाले सुगना मुंडा (पिता) व करमी (माता) के पुत्र अमर शहीद बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 ई को हुआ था। जिन्होंने आदिवासियों के साथ ब्रिटिश हुकूमत द्वारा किये जा रहे शोषण व अन्याय के खिलाफ उलगुलान छेड़ा था। जिससे अंग्रेज सरकार की नींद हराम हो गई थी।

           जिला प्रशसान द्वारा उलिहातु को एक पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करने की दिशा में अनेक योजनाएँं क्रियान्वित हैं। उलिहातु जाने वाली पक्की सड़क पर एक भव्य बिरसा मुंडा द्वार निर्मित है। उलिहातु स्थित आवासीय विद्यालय परिसर में भगवान बिरसा मुंडा से संबंधित एक म्यूजियम स्थापित करने हेतु भवन का निर्माण कार्य आरंभ है। यहां भगवान बिरसा मुंडा की एक भव्य व आकर्षक प्रतिमा स्थापित है। उनके आवासीय परिसर का सुंदरीकरण कर ‘‘बिरसा ओड़ाः‘‘  का निर्माण कराया गया है। बिरसा ओड़ाः में भगवान बिरसा मुंडा की आदमकद प्रतिमा स्थापित है। प्रत्येक साल बिरसा जयंती के अवसर पर 15 नवंबर को उलिहातु में भव्य समारोह का आयोजन किया जाता है, जहांँ हजारों की संख्या में खास व आम लोग आकर अमर शहीद वीर बिरसा को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं। 

                ‘ एक पर्यटक स्थल' : उलीहातू

          यहाँं आकर लोग गर्व महसूस करते हैं कि हम भगवान बिरसा मुंडा की भूमि पर आये हैं जिन्होंने अपने अदम्य साहस एवं चमत्कारी नेतृत्व की क्षमता से अग्रेजों के दाँंत खट्टे कर दिए थे। वे एक ऐसे स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने आम आदमी की पहचान से उपर उठकर भगवान का संबोधन प्राप्त किये।  

       प्राकृतिक सुंदरता के बीच टेढ़े मेढ़े पक्की सड़क घाटियों और वनों से आच्छादित क्षेत्र मानो यहां स्वर्ग उतर आया हो । ऐसी सुंदरता मनोरम क्षेत्र में लोग आकर अपने आप को भूल जाते हैं । और यहां के खो जाने का मन में भाव बनाने के लिए विवश हो जाते हैं। इसके विकास होने से लोगों का आवागमन बढ़ता जा रहा है । इसके और अधिक विकास करने से और साथ ही इस क्षेत्र में ठहरने के लिए रात्रि विश्राम  और भोजन पानी का व्यवस्था  होने से लोगों का आवागमन और भी बढ़ जाएगा । साथ ही, प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से लोगों का जीविकोपार्जन का एक साधन भी बन जाएगा। जिससे क्षेत्र का जीवन शैली में भी परिवर्तन  हो जाएगा ‌।