पलामू: स्वर्ण व्यवसायी के घर हुए हमले में कोताही, एएसआई निलंबित, सीएचसी के चिकित्सक की बर्खास्तगी के लिए विभागीय कार्रवाई प्रारम्भ ,पलामू: इलाज में लापरवाही ने ली युवक की जान, मौत बनी एक पहेली !

                                    मेदनीनगर : हरिहरगंज के स्वर्ण व्यवसायी चुन्नू सोनी के घर हुए जानलेवा हमले के बाद इसमें कोताही बरतने वाले हरिहरगंज के एएसआई चंडी प्रसाद को निलंबित कर दिया गया, जबकि गोली की आशंका जाहिर कर सीएचसी से घायलों को रेफर कर देने पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को बर्खास्त करने की कार्रवाई प्रारम्भ कर दी गयी है।

सड़क जाम के दौरान आक्रोशित ग्रामीणों ने जाम स्थल पर पहुँचे पलामू सांसद वीडी राम, एसपी इन्द्रजीत माहथा और विधायक कुशवाहा शिवपूजन मेहता से 48 घंटे के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी और मामले का उद्भेदन, एएसआई चंडी प्रसाद को निलंबित करने, डा. गोपाल प्रसाद को बर्खास्त करने, चौक-चौराहों पर सीसीटीवी कैमरा लगाने और पीड़ित परिवार को 20 लाख रूपये मुआवजा राशि और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की थी।

           ग्रामीणों की मांगों पर कार्रवाई करते हुए पुलिस अधीक्षक श्री माहथा ने तत्काल हरिहरगंज के एएसआई चंडी प्रसाद को निलंबित कर दिया, जबकि सांसद ने दूरभाष पर मुख्य सचिव को डॉक्टर गोपाल प्रसाद की लापरवाही और सीएचसी की लचर व्यवस्था की जानकारी दी। साथ ही डॉक्टर को बर्खास्त करने का आग्रह किया। सांसद ने बताया कि डॉक्टर को बर्खास्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी गयी है। विधायक और सांसद ने अपने-अपने कोटे से बाजार क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरा लगाने का भी  आश्वासन ग्रामीणों को दिया। 

हत्या में अपनों के हाथ से इंकार नहीं: एसपी 

पुलिस अधीक्षक इन्द्रजीत माहथा ने पीड़ित चुन्नू सोनी से मुलाकात की और उन्हें ढाढस बंधाया। उन्होंने व्यवसायी को भरोसा दिलाया कि हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए वे हरिहरगंज में ही कैम्प कर रहे हैं। जिस तरह बेवजह घटना को अंजाम दिया गया है, उससे परिचितों की संलिप्तता से इंकार नहीं किया जा सकता। 

       इधर, रांची से विधि विज्ञान प्रयोगशाला, रांची से फोरेन्सिक एक्सपर्ट की टीम भी घटनास्थल पर पहुंच गयी है और जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान कमरे के आलमीरा से एक चाकू और एक हथौड़ा मिला है।



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मेदिनीनगर: पलामू जिला अंतर्गत चैनपुर थाना क्षेत्र के पथरा निवासी संतोष साव के पुत्र विकास कुमार की मौत सदर अस्पताल में इलाज के दौरान की गई लापरवाही से हो गई।आश्चर्य की बात तो यह है कि परिजन यह दावा कर रहे हैं कि मृत युवक दाह संस्कार से पहले जिन्दा हो गया।तब परिजन उसका अंतिम संस्कार छोड़कर उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सक ने उसे दोबारा मृत घोषित कर दिया। इसके बाद दोपहर में उसका अंतिम संस्कार किया गया। 

  प्राप्त जानकारी के अनुसार विकास कुमार के शरीर में खून की कमी हो गयी थी। तब उसे इलाज के लिए गत 21 अप्रैल को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दो दिन इलाज के दौरान उसे खून भी चढ़ाया गया। जब वह कुछ ठीक हुआ तो परिजन उसे घर ले गए। इसी बीच मंगलवार की रात करीब 12 बजे वह बेहोश हो गया। आनन-फानन में उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां डा. राजीव नयन ने उसका इलाज किया और बाद में उसे मृत घोषित कर दिया। शव को परिजन गांव ले गए और सुबह में दाह संस्कार की तैयारी करने लगे। इस दौरान लोगों ने देखा कि  उसकी सांस चल रही है। तब इलाज के लिए पुनः उसे सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां वार्ड तीन में उसे वहां कार्यरत चिकित्सक ने इलाज किया। उसके शरीर की जांच की और पुनः मृत घोषित कर दिया। 

मृतक के चाचा शिवपूजन साव और उसके भाई मुकेश कुमार ने आरोप लगाया कि अस्पताल में उचित इलाज नहीं होने के कारण विकास की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि इलाज में बरती गई लापरवाही ने  विकास की जान ले ली। इस संबंध में डा. राजीव नयन ने बताया कि रात्रि में उन्होंने ही विकास का इलाज किया था। कुछ देर बाद उसकी मौत हो गयी थी। पूरी संतुष्टि के बाद ही उसे मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया था। परिजन किस आधार पर विकास के जिन्दा होने का दावा कर रहे हैं, यह समझ से परे है।बहरहाल विकास की मौत के बाद पुनः जीवित होना एक रहस्यमयी पहेली बनी हुई है।