सच ही कहा गया है जिसका कोई नहीं उसका भगवान होता है.-अशोक

दिव्यांग मुन्नी चौधरी की  पार्थिव देह पंचतत्व में विलीन

सच ही कहा गया है जिसका कोई नहीं उसका भगवान होता है.

राँची(03फर.) : अस्साहय दिव्यांग मुन्नी चौधरी शारीरिक विकलांगता के साथ साथ मानसिक मंदता से भी पीड़ित थी। अपने परिजनों द्वारा वर्ष 2004 में रिनपास कांके रांची के पास लावारिस अवस्था में छोड़ दी गई थी । मुन्नी चौधरी को अपने नाम के अलावा कुछ भी याद नहीं था । इसे पिछले 16 वर्षों से निर्मल हृदय ईस्ट जेल रोड में आश्रय मिला हुआ था। जिसका  रविवार 2 फरवरी दोपहर को लम्बी बीमारी के पश्चात् हृदय गति रुक जाने से इनका स्वर्गवास हो गया था । आज  मुक्तिधाम हरमू में श्री संतोष अग्रवाल हिनू रांची ने पार्थिव देह को मुखाग्नि देकर विधि विधान से अग्नि को समर्पित कर पंचतत्व में विलीन किया।अंतिम संस्कार के समय "समन्वय मंच" विश्व हिन्दू परिषद् झारखंड के अशोक अग्रवाल,  राजू उरांव, रामवृक्ष राम, आशीष मिंज व विजय मिंज ने श्रद्धांजली दी।