झामुमो को पहले ही अंदेशा हो गया था की बाबूलाल बीजेपी की बी टीम है

Source-Ranchi Live. बड़ी खबर : झामुमो ने बाबूलाल मरांडी पर साधा निशाना, कहा- झामुमो को पहले ही अंदेशा हो गया था की बाबूलाल बीजेपी की बी टीम है, इसीलिए चुनाव में उन्हें तरजीह नहीं दी, वरना वे चुनाव जीतने के बाद अपने विधायकों को बीजेपी को सप्लाई कर देते :

बाबूलाल मरांडी के बीजेपी में विलय पर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने प्रतिक्रिया दी है। आज रांची में प्रेस कांफ्रेंस कर झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा है कि बाबूलाल मरांडी उस जहाज पर सवार हो रहे हैं, जो डूबने की स्थिति में है। दिल्ली विधानसभा चुनाव के ताजा परिणाम ने यह साफ कर दिया है।

सुप्रियो ने कहा की झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजे आए दो महीने होने जा रहे हैं, लेकिन अब तक बीजेपी अपना नेता नहीं चुन सकी। क्योंकि उनके पास नेतृत्व क्षमता नहीं है। अब बाबूूलाल को नेता प्रतिपक्ष बनाया जाएगा। इस स्थिति में बाबूलाल का बीजेपी में जाना कोई संयोग नहीं एक प्रयोग है। लेकिन यह प्रयोग विफल होने जा रहा है। 

सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि हालांकि जेएमएम को पहले से ही अंदेशा हो गया था की बाबूलाल मरांडी बीजेपी की 'बी' टीम है। बाबूलाल जी बीजेपी के बिना खुद को अधूरा पाते हैं। इसीलिए उन्होंने चुनाव में बाबूलाल को तरजीह नहीं दी। वरना वे चुनाव जीतने के बाद अपने विधायकों को बीजेपी को सप्लाई कर देते। 

श्री सुप्रियो ने कहा की 2014 के चुनाव में जेवीएम से 8 विधायक चुनाव जीते। उधर बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला, तो बाबूलाल ने ही बीजेपी नेतृत्व से कहा कि घबराएं नहीं। इसके बाद छह विधायकों को उधर भेज दिया। 

जेएमएम नेता ने आरोप लगाया कि बाबूलाल कमोडिटी मार्केट के होलसेलर की तरह राजनीति करते रहे। 2019 के विधानसभा चुनाव में भी बाबूलाल बीजेपी की बी टीम बनकर अकेले सभी सीटों पर चुनाव लड़ते रहे। इस बार जेवीएम के दो विधायक जब उनका सारा खेल समझ गए, तो बाबूलाल ने उन्हें निष्कासित कर दिया और अपने कुछ इंप्लॉय के साथ बीजेपी में जाने को तैयार हो गए।

जेएमएम महासचिव ने कहा कि अब तक जल, जंगल, जमीन, आदिवासी, दलित, अल्पसंख्यक के नाम पर लड़ाई का बाबूलाल ने ढोंग रचा। कभी विपक्ष के साथ हुए और कभी अकेले चले। उनका एक मात्र मकसद जल, जंगल, जमीन, आदिवासी, दलित विरोधी बीजेपी को किसी प्रकार सत्ता में लाना था।

जेएमएम नेता ने कहा कि जनमत के खिलाफ जाने से पहले बाबूलाल को विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देना चाहिए। साथ ही वे दसवीं अनुसूचि का भी ख्याल रखें।