शरीर के मृत्यु के बाद मोक्ष हेतु जीव का राम नाम से उद्धार करने वाले - शुकामृत दास

खूँटी : हरे कृष्ण प्रचार केंद्र खूंटी के तत्वधान में एक दिवसीय भागवत गीता कार्यक्रम का आयोजन अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावना मृत संघ के कृष्ण भक्त शुकामृत दास जी ने प्रारंभ किया।  कथावाचक शुकामृत दास ने कार्यक्रम का प्रारंभ करते हुए कहा कि शिवरात्रि शिव विवाह का मार्मिक अर्थ भगवत गीता है । क्योंकि भगवान शिव जी माता पार्वती से कहते हैं जो गीता को नहीं जानता, जो गीता नहीं पढ़ता और जो गीता को नहीं पढ़ाता है, वह इस मनुष्य लोक में सबसे पापी इंसान है। वह अधम एवं नाराधाम है, उसके कूल, शीलता, गुण ,व्यवहार,पैसे को धिक्कार है, उसके घर,पत्नी,बच्चे,को धिक्कार है,उसके पूजा,प्रतिष्ठा, दान को धिक्कार है, उसकी महानता को धिक्कार है, जब यह कहते हुए शिवजी ना थके तो आगे उन्होंने यह कहा यह सब के सब असुर हैं क्योंकि जो श्रीमद्भागवत गीता नहीं पढ़ेगा। उसमें सारे असुरी अवगुणों का आना अनिवार्य है! इस तरह से आगे दास जी ने कहा भौतिक जगत के सूट-बूट पहने लोग सब बेकार है क्योंकि उसे सिर्फ दो अगरबत्ती,थोड़ा इलायची दाना सरोकार है ‌।भगवान शिव का उपदेश उनके लिए नदियों के पार है! जिस प्रकार नदियों में श्रेष्ठ गंगा है, करोड़ों देवी देवताओं में श्रेष्ठ विष्णु है, पुराणों में श्रेष्ठ भगवत है,उसी प्रकार करोड़ों वैष्णव में श्रेष्ठ भगवान शिव शंभू है, वैष्णव नाम यथा शंभू! परंतु शरीर के मृत्यु के बाद मोक्ष हेतु  जीव का राम नाम से उद्धार करने वाले शिवजी का परम उद्देश्य जीवन पर्यंत श्रीमद्भगवद्गीता ज्ञान अनुपालन नहीं करते। यद्यपि यह नहीं जान पाते परम वैष्णव भगवान शिव की कृपा से ही कृष्ण भक्ति संभव है।मुख्य यजमान के रूप में एस.एस टाइल्स एवं सेनेटरी के मालिक शशि कुमार उपस्थित हुए उन्होंने प्रचार केंद्र को एक होरन स्पीकर भेंट किया। मौके पर आए हुरलुंग कुंजला गांव, नगर पंचायत के आम जनों के बीच हरि नाम महिमा ग्रंथ के साथ फल एवं महाप्रसाद का वितरण किया गया।