बिजली बिल में किये गये बढ़ोतरी शुल्क निति को वापस ले सरकार नहीं तो जय भारत सामंता पार्टी


पुरे कोल्हान में चलायेगी आंदोलन


नये बिजली बिल को लागु करने के बिरोध में सरकार के बिरूद्व खोला मोर्चा


साढ़े छह हजार करोड़ घाटे में चल रही राज्य, सरकार जनता पर थोफ रही है अतिरिक्त बोझ


पुंजी पत्तियों की है सरकार,गरीब गुरबों का नहीं


नई बिजली दर का र्निणय वापस ले और किसानों को बिजली कर से मुक्त करें सरकार


12 सौ मेघावट बिजली उत्पादन के लिए सरकार ने किया 22 कंपनियों के साथ अनुबंध, फिर भी नहीं लगी राज्य में एक भी प्लांट


संतोष वर्मा भास्कर न्यूज जगन्नाथपुर। राज्य सरकार द्वारा नये बिजली बिल लागु किये जाने को लेकर जहां बिरोध प्रदर्शन शुरू हुए. वहीं सोमबार को राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा जय भारत सामंता पार्टी के जगन्नाथपुर कार्यालय में अपने समर्थकों के साथ बैठक किया गया और जन बिरोधी राज्य सरकार के द्वारा बिजली बिल के गलत निर्णय पर जम कर बरसे और श्री कोड़ा ने कहा की सरकार के द्वारा पिछले दिन बिजली बिल में किये गये बढ़ोतरी का जो र्निणय लिया गया है वह घोर जनविरोधी र्निणय है.तत्काल सरकार को बिजली बिल में की गई बढ़ोतरी बिल को वापस लेना चाहिए.इससे पूर्व 2012 से 15 में जब भी बढ़ोतरी हुई थी 10से 15% हुआ था इस बार 90 से 98 प्रतिशत की बढ़ोतरी किया गया.इस बढ़ोतरी से शहरी क्षेत्र व ग्रामीण क्षेत्र के बिजली उपभोक्ताओं को तकरिबन प्रति युनिट 2 से ढाई रूपया प्रति युनिट बढोत्तरी किया गया है.जिससे जो उपभोक्ता को 50 रूपया फिक्श देना पड़ता था, जबकी नई दर लागू होने से उन उपभोक्ताओं 50 रूपये के बदले 75 रूपये देना होगा.और जिन उपभोक्ता को 150 रूपया देना पड़ता था अब उन्हें 1100 रूपया प्रतिमाह देना होगा.सरकार के द्वारा इस निर्णय से जो शहरी क्षेत्र व ग्रामीण क्षेत्र के बिजली उपभोक्ता है, इन लोगों के ऊपर में सबसे अधिक आर्थिक बोझ बढ़ रहा है.जबकी उद्योग

उद्यमी क्षेत्र के उद्योगपत्तियों को पिछले बिजली बिल की अपेक्षा कम बिजली बिल देना पड़ेगा.बिजली बिल में किये गये बढ़ोतरी सामाजिक क्षेत्र के प्रति सरकार का सहयोगात्मक रवैया नहीं है. उधोग जगत के प्रति वर्तमान सरकार मेहरबान है.नये बिजली दर का पालन उद्योग जगत के लोग कर सकते है.छोटे छोटे उद्योग क्षेत्र के मालिक सरकार के द्वारा बढ़ाया गया बिजली बिल का बोझ को उठा सकता है. वहीं श्री कोड़ा ने कहा की किसान को पहले 70 पैसा देना पड़ता लेकिन अब किसानों को पांच रूपया देना पड़ेगा प्रति युनिट बिजली दर. कहा गया कि किसान उत्पादन बंद कर देगा या फिर लागत बढ़ जायेगा.कृषि उत्पादन बढ़ेगा तो  महगांई बढ़ायेगी. साथ ही राज्य की अर्थ व्यवस्था व्यापक रूप से प्रभावित होने के साथ चरमरा जायेगी.सरकार के द्वारा लिया गया र्निणय जनताहीत में उचित नहीं है.अर्थ व्यवस्था का दृष्टीकोण से दुरद्रस्तिता वाली र्निणय नहीं है.जबकी सरकार कह रही है की घाटा को पूरा करने के लिए हम अतिरिक्त बिजली बिल में बढ़ोतरी कर रहे है.श्री कोड़ा ने कहा की वर्तमान राज्य सरकार साढ़े छह हजार खरोड़ रूपये की घाटे में चल रही है जिसे पूरा करने के लिए जनता पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है.आज सरकार को चाहिए की बिजली उत्पादन को बढ़ाया जाय. आज सरकार 70 प्रतिशत बिजली बाहर से खरीद रही है.जबकी सरकार यदी अपने राज्य में बिजली उत्पादन करता है तो अपने राज्य के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में रहने वालें लोगों व उद्यमियों को सस्तेदर में बिजली दे सकती है.जबकी सरकार के द्वारा 2016 में 12 सौ मेघावट पावर सौर्य ऊर्जा के माध्यम से उत्पादन करने के लिए छोटे बड़े  22 कंपनियों के साथ अनुबंध (एमओयु) कर चुका है.यदी इन सौर्य ऊर्जा योजनाओं को स्थापित कर दिया जाय तो सस्ते दामों में बिजली मिल सकती है राज्य में.लेकिन एक भी सौर्य ऊर्जा वाली बिजली उत्पादन प्लांट नहीं लगा राज्य में.इन सभी मामलों को लेकर बिजली बिल बढ़ाये जाने को लेकर सरकार के इस र्निणय के बिरोध में जय भारत सामंता पार्टी बिरोध करता है.सरकार से मांग करती है की जनबिरोधी बिजली शुल्क पुनः वापस लें अन्यथा जय भारत सामंता पार्टी पुरे कोल्हान में बृहत पैमाने पर आंदोलन चलायेगी.साथ ही राज्य के किसानों को इस बिजली बिल की नई शुल्क से मुक्त किया जाय और किसानों मुफ्त बिजली मुहैया कराया जाय ताकी राज्य के किसान बेहतर उत्पादन कर सके और राज्य में अनाज का अभाव ना हो.