जनसंख्या विस्फोट से नाराज प्रकृति ने फिर से कसा लगाम, चाइना बना गवाह

वैज्ञानिक दिवस पर पर्यावरणविद ने पौधरोपण एवं वितरण के बाद गोष्ठी में कहा 

सिमडेगा,झारखंड वैज्ञानिक दिवस पर सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड के उर्सुलाइन कॉन्वेंट बालिका उच्च विद्यालय जामपानी में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन बतौर मुख्यातिथि विश्वव्यापी पर्यावरण संरक्षण अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पर्यावरण धर्म व वनराखी मूवमेंट के प्रणेता पर्यावरणविद कौशल किशोर जायसवाल ने पर्यावरण धर्म के प्रार्थना के साथ आम का पौधा लगाकार किया। उन्होंने पर्यावरण धर्म के बारे में छात्राओं को विस्तृत जानकारी देते हुए कार्यक्रम में शामिल लोगों को पर्यावरण धर्म के आठ मूल मंत्रों की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष 2019 में नेपाल भूटान समेत देश के15 राज्यों के विभिन्न स्थानों पर वृक्षों पर रक्षाबंधन और पर्यावरण धर्म पर गोष्ठी का आयोजन कर दो लाख निःशुल्क पौधा वितरण और रोपण का लक्ष्य निर्धारित कर कार्यक्रम की शुरुआत पलामू जिले के डाली बाजार के कौशल नगर से किया गया था। देश के 15 राज्यों और झारखंड के 17 जिलों के विभिन्न स्थानों पर निशुल्क पौधा वितरण सह रोपण कर पर्यावरण धर्म पर गोष्टी के आयोजन और वृक्षों पर रक्षा बंधन करते हुए शनिवार को उसी कड़ी में देश के महान विभूति वैज्ञानिक डॉ सीबी रमण जी को स्मरण करते हुए उनके नाम पर 51पौधे लगाए और लोगों में वितरित भी किया। पर्यावरणविद कौशल ने कहा कि डॉ रमण समेत अन्य महापुरुषों की पूजा भगवान के समान इसलिए किया जाता हैं क्योंकि उन सबों ने वृक्ष के समान स्वयं की स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज के लोगों के लिए परोपकार करते हुए सामाजिक प्रदूषण दूर करने का कार्य किया था। पर्यावरण विद कौशल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में संत, सरोवर और तरुवर की पूजा का अलग महत्व है। सृष्टि में इन तीनों की रचना ही परमार्थ के लिए होता है। इन सबों से धरती और ब्रह्मांड पर रहने वाले 84 लाख योनि जीवों की सुरक्षा होती है । श्री जायसवाल ने कहा कि मानवीय भूलों के कारण जनसंख्या विस्फोट के साथ उद्योग एवं गाड़ियों के प्रदूषण से प्रकृति की लगाम टूटने से प्रदूषण की आग पूरी दुनिया में लगी है । जिसे पानी से नहीं शुद्ध हवा से बुझाया जा सकता है। जबकि शुद्ध हवा बनाने का कोई उद्योग नहीं है । पेड़ पौधे और वन से ही प्रकृति की रक्षा संभव है। 

उन्होंने कहा कि सृष्टि जब बेलगाम हो जाती है तब प्राकृतिक आपदा उसे नियंत्रित करती है। प्रकृति ब्रह्मांड के हरेक जीव जंतु को नियंत्रित करने के लिए उसका विकल्प बनाकर रखा है ताकि समय पर उसे तय दायरे में रखा जा सके। प्रकृति ने फिलहाल चाइना में कोरोना वॉयरस से तबाही मचाई है। यह मानवीय भूल का ही परिणाम है। जिसे वहां के लोग भुगत रहे हैं। उन्होंने स्कूली बच्चों को चलने वाले और बिना मिट्टी ,पानी के भी जिंदा रहने वाले पेड़ों के बारे में बताते हुए समापन किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने पर्यावरणविद के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि श्री कौशल ने अपने जीवन का अधिकांश समय समाज और मानव मात्र के उत्थान में लगा दिया है। जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य सिस्टर फुल रिदा डुंगडुंग ने किया जबकि संचालन सुप्रियर, सिस्टर कॉर्निया डूंग डूंग ने की। वहीं धन्यवाद ज्ञापन सि० किरण एक्का ने किया। मौके पर सि० कुमुदिनी सोए, सि० नीतू कुल्लू, मुक्तक केरकेट्टा, विलन टोपनो, डोरोथीया कुल्लू ,थर्डवीस किंडो, बसंत तीरकी ,सुकृनत डुंग डुंग, रेशमा ब्लू ,अनीता , बॉलिंग ब्लू, जीवन लुगुन समेत छात्राएं शामिल थी।