खूँटी//सशक्त महिला की मिसाल हैं महिला किसान

*बदलाव की उत्प्रेरक हैं लिली

सशक्त महिला की मिसाल हैं महिला किसान

खूँटी । 38 वर्षीय लिली पूर्ति खूँटी जिले के मुरहू प्रखंड के हस्सा पंचायत के छोटे से गाँव हेसेल की रहने वाली हैं। जिला मुख्यालय से करीब 10 कि.मी. दूर स्थित हेसेल गाँव कई अन्य गाँवों की तरह एक कृषि प्रधान गाँव है। इस गाँव के ज्यादातर लोग अपने खेती व रोज़ी-रोटी के लिए खरीफ़ फसल पर आश्रित थे। अपने जीवन को सही तरीके से बदलने और गांव के लिए सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करने के उद्देश्य से लिली ने सरकारी योजना के माध्यम से जुड़ कर ना केवल खुद का अपितु गाँव के कुल 31 महिला किसानों को लाभ दिलवाया।

       वर्ष 2018 में लिली ग्रामीण विकास विभाग (जेएसएलपीएस) के अंतर्गत सुचारू दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वयं साहयता समूह से जुड़ने का मौका प्राप्त हुआ। इसके पश्चात इसी विभाग के द्वारा सुचारू राज्य की महत्वाकांक्षी परियोजना “जोहार” के तहत लिली अपने गाँव की 30 अन्य महिलाओं के साथ मिल कर सिंगी महिला उत्पादक समूह का गठन किया। जुलाई 2018 में गठित इस उत्पादक समूह का मुख्य उद्देश्य उच्च मूल्य कृषि (हाई वैल्यू एग्रीकल्चर) को बढ़ावा देने का था। उसी माह लिली का चयन आजीविका कृषक मित्र (ए.के.एम) उत्पादक समूह के माध्यम से किया गया। उक्त पद पर रहते हुए लिली पूर्ति ने विभिन्न पौधों को उपजाने की विधि (पी.ओ.पी), श्री विधि, लाइन सोइंग व खेती से जुड़े अन्य मपांकों का आवासीय प्रशिक्षण मिला। प्राप्त प्रशिक्षणों के परिणामस्वरूप लिली ने हेसेल में मौजूद अन्य महिला किसानों को नए विधि व तकनीक से खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया। इसी क्रम में जोहार परियोजना के अंतर्गात अनुदान पर सोलर लिफ्ट सिचाई की इकाई सिंगी महिला उत्पादक समूह को आवंटित हुई जिसके माध्यम से हेसेल गाँव की 21 एकर चिन्हित ज़मीन बिना किसी व्यय के सिचित की जा सकती थी। इसकी स्थापना से हेसेल ग्रामवासियों में ख़ुशी की लहर आई किन्तु पेलोल डैम की एक छोटी सी नहर होने की वजह से उसमे पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा था। लिली ने अपने पति नीरज मुंडू व उत्पादक समूह की महिलाओं संग मिल कर ग्राम सभा में इस समस्या के हल के लिए चेक-डैम बनाने का प्रस्ताव रखा। चेक-डैम का निर्माण कराने के प्रस्ताव का समर्थन सभी ग्रामीणों के तरफ से मिला व साल भर के अन्दर इसका निर्माण सुनिश्चित हुआ। पानी की उचित सुविधा को सुनिश्चित करने के लिए लिली व अन्य ग्रामीणों ने मिल कर चेक-डैम के आगे एक बोरी-बाँध का निर्माण किया। जिससे उपलब्ध पानी के आयतन में व्यापक वृद्धि देखने को मिली। इस बढे हुए जल-स्तर को पास में लगे कुआँ से पाइप के माध्यम से जोड़ा गया, जिससे सिंचाई के बाद भी कुआँ का जल-स्तर कम नहीं होता।

कल तक जिस ज़मीन पर केवल खरीफ पौधे उपजते थे आज वहां तीनों मौसम के मौसमिक फसल की खेती कर किसान व उनका परिवार अपने उत्पादों को बेच कर साल भर में लगभग 70,000 रू. की आमदनी कर पा रहे है। लिफ्ट सिचाई के फायदों को देखते हुए आस-पास के अन्य किसान भी समानांतर इकाई लगाने के लिए इक्षुक व प्रेरित हो रहे हैं।