महिला दिवस पर विशेष- सशक्त सहियाएँ कर रहीं स्वस्थ्य समाज का निर्माण

स्वास्थ्य सेवाएँं उपलब्ध कराने में खूंटी की सहियाओं का प्रदर्शन सराहनीय

खूँटी । देश की प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक स्वास्थ्य प्रणाली में नई दिशा देने के लिए जिस कल्पना से 2005 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की शुरूवात की गई थी, उसकी फसल देश के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में लहलहा रही है। उपचारात्मक सुविधाओं एवं सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुविधाओं के व्यापक प्रभाव की दिशा में ( सहियाओं ) आशा कार्यकर्ता ने अपनी स्वास्थ्य सेवाएँ दे कर स्वास्थ्य सूचकांक को पुष्प पल्लवित करने में अपना अहम योगदान दिया है। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के मलिन बस्तियों के लिए एक वरदान की तरह है। खूंटी की 840 कार्यरत सहियाओं द्वारा शत प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित कराने में अपनी अहम भूमिका निभाई है।स्वास्थ्य सेवा को सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक पहुंचाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन में भी सहिया की अहम भागीदारी होती है। सहिया जितनी प्रशिक्षित होंगी, उतना ही लाभ विभाग और लाभुक को मिलेगा।सिविल सर्जन डॉ प्रभात कुमार बताते हैं कि ये एक उत्प्रेरक की भांति हैं, जिनके सार्थक प्रयासों से खूंटी जिले में सर्वसुलभ, रोगी केंद्रित एवं प्रभावी स्वास्थ्य सुविधा सेवाएँ,  मातृ-मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर, परिवार नियोजन, प्रजनन दर एवं अन्य राष्ट्रीय कार्यक्रमों-तपेदिक मलेरिया आदि में सुधार हुआ है।

जिला कार्यक्रम समन्वयक खूँटी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डा0 उदयन शर्मा का कहना है कि* आबादी के अनुपात में सामाजिक स्वा0 कार्यकर्ता के रूप में नियुक्त सहियाओं को सभी तरह के प्रजननात्मकों विषयो, शिशु, मातृ, किशोर, किशोरियों, बाल स्वास्थ्य की सुरक्षा के साथ-साथ, कुपोषण की विभिन्न आयाम, व्याप्त संचारी एवं गैर संचारी रोगों के विभिन्न अध्याओं से अवगत कराने के लिए जिला व प्रखण्ड स्तर से समय-समय पर पांच दिवसीय आवासीय प्राशिक्षण दे कर व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। चेहरे पर मुस्कान लिए, मौसम के हर थपेड़ो को सहते हुए समाज में स्वास्थ्य के लिए जागरूकता अभियान, अंतिम तबके के पास स्वास्थ्य सुविधा पहुँचाने, स्थानीय स्वास्थ्य योजना बनाने के साथ-साथ सहियाएँ बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में जिम्मेदारियाँ बखूबी निभा रही है।इसमें मुख्य रूप से गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व चार जाँच कराना, संतुलित आहार के बारे में बताना एवं उनके बच्चे की जन्म की तैयारी करना।प्रसव पश्चात बच्चे को टीकाकरण करवाना, माँ का देखभाल करना नवजात शिशुओं की 42 दिन तक 7 बार दौर कर उनके स्वास्थ्य की देखभाल करना।सितम्बर 20 से छोटे बच्चों का एच0 बी0 वार्ड0 सी0 के तहत देखभाल करना जिसमें 15 माह तक सहिया बच्चों के विकास पर पैनी नजर रखना।ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस के दिन सहिया अपनी परिधीय कार्यकत्तों - ए0 एन0 एम0, आंगनबाड़ी कार्यकत्तों के साथ स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करती है जैसे - डयू लिस्ट बना कर उस दिन गर्भवती एवं बच्चों को बुलाकर टीकाकरण करवाना, ओ0 आर0 एस0, आई0 एफ0 ए0, क्लोरोक्वीन, परिवार नियोजन की गोलियाँ कडोम इत्यादि देना।एनीमिक महिलाओं को पोषण संबधी सलाह एवं उन पर विशेष ध्यान देना। कमजोर वजन वाले बच्चों को कुपोषण उपचार केन्द्र रेफर करना। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के दिन हर गर्भवती माता को 9 तारीख को जाँच कराना। तपेदिक, मलेरिया, कुष्ठ की रोगियों की पहचान कर दवा खिलाना। स्वास्थ्य संबधी कल्याणकारी अद्यतन जानकारी के साथ-साथ जन समुदाय में प्रजनन प्रणाली के संक्रमण/यौन संचारित संक्रमण सहित सामान्य संक्रमण की रोकथाम के बारे में आमजनों को बताना।  इन सहिया बहनों के समाज में स्वास्थ्य की व्यवहार परिवर्तन की बयार बह रही है एवं समुदाय भी इसे सकरात्मक रूप से अंगीकार कर रही है। इसमें कहने की कोई अतिश्योक्ति नही है कि समाज में यह सकारात्मक परिवर्तन सहिया के निरंतर प्रयास एवं अभिनव पहलों का परिणाम है।