नोवेल कोरोना वायरस को लेकर सतर्कता व सावधानी आवश्यक-- सिविल सर्जन

खूँटी । नोवेल कोरोना वायरस दुनियाभर में हाहाकार मचा दिया है। लोग इसके शिकंजे में न आ जाए इसके लिए सभी ओर बचने और सावधानी के अनेक तरीके अपनाए जा रहे हैं। इस निमित्त जिले के सिविल सर्जन प्रभात कुमार ने लोगों को स्वत: जागरुकता लाने के लिए अपिल करते हुए कहा कि नोवेल कोरोना वायरस से अनावश्यक डरने की आवश्यकता नहीं, सावधानी व सतर्कता से बचाव आसान है। इसे फैलने से आप रोक सकते हैं। यह छोटी सी सावधानी अत्यंत महत्वपूर्ण है। कोरोना वायरस के लक्षण हैं नाक बहना, कफ और खांसी, गले में दर्द, सिर दर्द, कई दिनों तक रहने वाला बुखार, निमोनिया व ब्रोंकाइटिस।उनके द्वारा बताया गया कि एहतियातन के तौर पर जनसमुदाय में कोरोना वायरस से बचाव हेतु अपने हाथ साबुन और पानी या हैंड सैनिटाइजर या अल्कोहल युक्त हैंड रब से साफ किया जाना है। खांसते एवं छींकते हुए अपनी नाक एवं मुंह को टिशू पेपर या हथैली से ढकें। जिन्हें सर्दी एवं फ्लू जैसे लक्षण हो उनके साथ करीबी संपर्क बनाने से बचें। इसके अलावा खाने को अच्छे से पकाएं, मीट एवं अंडे को भी पकाकर ही खाएंँ एवं जानवरों के संपर्क में कम आये। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में कोरोना वायरस के मामले लगातार सामने आने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा कोरोना वायरस को अंतर्राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया है।सिविल सर्जन द्वारा बताया गया कि नोवेल कोरोना वायरस से बचाव व सावधानी के लिए आवश्यक कर ली गयी हैं। उन्होंने बताया कि आइसोलेशन वार्ड की व्यवस्था की गई है। तथा चिकित्सकों व नर्सों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। सभी चिकित्सा, पारा मेडिकल कर्मी एवं अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ता को कोरोना वायरस सम्बन्धित सेंसिटाइजेशन कार्यशाला के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है।इसके साथ ही जिला अंतर्गत इस सम्बन्ध में जनजागरूकता लाने का निरन्तर प्रयास किया जा रहा है। तथा इससे जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र या 24×7 टॉल फ्री हेल्पलाइन नंबर 104 पर कॉल करें।   इस वायरस का आकार 400 से 500 माइक्रोन होता है तो कोई भी मास्क इसे रोक सकता है। ज्यादा कीमत का मास्क लेने की आवश्यकता नहीं है। यह वायरस हवा में नहीं रहता, यह किसी वस्तु पर या किसी जीव पर ही एक जगह से दूसरी जगह जाता है। इसलिए यह हवा से नहीं फैलता। यह वायरस धातु पर पड़ा हो तो 12 घंटों तक ही जीवित रहता है, किसी ऐसी संक्रमित धातु को छूने के बाद साबुन और पानी से अच्छी तरह हाथ धोएँ। दिन में कई बार अपने हाथों को धोएँ ।कपड़ों पर यह वायरस 9 घंटों तक रहता है, कपड़ों को अच्छी तरह साबुन से धोएं और धूप में अच्छी तरह सूखने दें। यह वायरस 26 से 27 डिग्री तापमान पर आने पर मर जाता है, इसलिए गर्म पानी पिएँ और सूरज की धूप लें, आइसक्रीम और ठंडे पदार्थ खाने से परहेज करें।

गर्म नमक के पानी से गरारे करें, यह वायरस को फेफड़ों तक पहुंचने से रोकता है। भीड़भाड़ वाले स्थानों में जाने से बचें। अंडा व किसी भी प्रकार का मीट मछली आदि का सेवन करने से परहेज करें। साथ ही उन्होंने अपील की है कि इसके बचाव व सतर्कता से सम्बन्धित जानकारी अपने आस-पास के लोगों को भी दें। ताकि आमजनों के बीच जागरूक वातावरण बन सके।