कोरोना से डरें नहीं, तन और मन को रखें स्वच्छ और पवित्र - शुकामृत

खूँटी । हरे कृष्ण प्रचार केंद्र खूंटी के तत्वाधान में एक दिवसीय भगवत गीता  कार्यक्रम का आयोजन किया गया । जिसका शुभारंभ  इस्कॉन भक्त शुकामृत दास जी ने किया। प्रवचन करते हुए दास जी ने  बतलाया कि श्रीपाद "भक्ति विकास महाराज  कहते हैं कोरोनावायरस की जय!  "राखें कृष्ण मारे के""मारे कृष्ण राखे  के" जिसका कृष्ण रक्षा करना चाहे उसे कोई मार नहीं सकता और जिसे कृष्ण मारना चाहे उसकी कोई रक्षा नहीं कर सकता है । भक्तों को इससे डरने की जरूरत नहीं भक्त पूर्ण तरह से कृष्ण भावना भावित होते हैं । अभी दुनिया में कोरोनावायरस का बहुत श्रवण-कीर्तन चल रहा है डर से सभी लोग सोचेंगे हम असुरक्षित हैं परंतु हमारी एक ही रक्षा भगवान श्री कृष्ण के चरण कमल हैं तो हम कोरोनावायरस की जय कहते हैं। परंतु हम भक्तों को भी वायरस लगा है चैतन्य महाप्रभु की करुणा का "हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे" तभी तो हम सभी भक्तों एक साथ श्रवन, कीर्तन, विष्णु का स्मरण हेतु उपस्थित हैं आगे दास जी ने कहा हम लोग कोरोना भावना भावित नहीं कृष्ण भावना भावित हैं । हमें तत्वों से भय को समझना होगा शास्त्र बतलाते सब कुछ भगवान से आया है, तो कोरोना क्यों नहीं? भगवान श्री कृष्ण को कोरोना से भिन्न मानना ही डर का मूल कारण है, गीता में भगवान कहते हैं मैं ही मृत्यु हूं जैसे ही हम समझ जाएं कोरोनावायरस भगवान ने भेजा है जिसके पाप कर्म हैं उसे तो लगेगा ही वरना पूरी दुनिया के डॉक्टर हजारों लोगों को मरने से और लाखों लोगों को पीड़ित होने से क्यों नहीं बचा पा रहे हैं, इसका जवाब सरकार नहीं दे सकती है‌। इससे बचाव का समाधान शास्त्र अनुसार कृष्ण भावना भावित है जितना ज्यादा कृष्ण भावना भावित होंगे डर कम लगेगा, जितना कम कृष्ण भावना भावित होंगे डर ज्यादा लगेगा, पूरी तरह से कृष्ण भावना भावित होंगे डर  लगेगा ही नहीं, यह भक्ति, आध्यात्मिक आत्मा का स्तर है जहां डर नहीं तत्व काम करता है परंतु हमें वर्तमान स्थितिनुसार तन और मन दोनों को स्वच्छ और पवित्र रखकर भौतिक उपाय द्वारा डॉक्टर की सलाह मानते हुए  भौतिक शरीर को भक्ति हेतु  बचाना होगा, साधन से साध्य को पाना होगा।   मौके पर आए हुरलूंग गांव एवं नगर पंचायत के भक्तों के बीच श्री कृष्णमहाप्रसाद  खिचड़ी ,चटनी ,भगवत गीता का वितरण किया गया! कार्यक्रम में विमल प्रभु अभिषेक प्रभु चंदन प्रभु का अहम योगदान रहा।