झारखण्ड जेनरल कामगार युनियन के बैनर तले राज्यपाल भवन के समक्ष एक दिवसीय आमरण अनशंन कर बिरोध जताया



जगन्नाथपुर भास्कर न्यूज।  राज्य के बिभिन्न क्षेत्रों में स्थापित खन्न क्षेत्र में कार्यरत्त मजदुरो को हो रही छट्टनी, मजदुरी भत्ता का भुगतान में हो रही अनियमित्ता को लेकर झारखण्ड जेनरल कामगार  युनियन के अध्यक्ष जॉन मिरल मुण्डा के अध्यक्षता में राज्यपाल भवन के समक्ष एक दिवसिय आमरण अंश कर धरना प्रदर्शन किया गया.इस आमरण अनशंन में जगन्नाथपुर अनुमंडल क्षेत्र तीन सौ से अधिक मजदुरों नें भाग लिया.वहीं मजदुरो को संबोधित करते हुए श्री मुण्डा ने कहा झारखंण्ड अलग हुए 17 साल हो गया है. 6-7 सात मुख्यमंत्री बने लेकिन बिरसा मुण्डा सिध्दू कान्हु, तिलकामांझी और नारा हो, पोटो हो बुधुवीर गंगाराम कलुंडिया का सपना पुरा नहीं हुआ है.यहां की भाषा धर्म संस्कृति का विकास, जमीन की सुरक्षा किसानों को पानी,आदिवासियों को रोजगार नहीं मिला.लेकिन झारण्ड बनने के बाद सांसद,विधायक करोड़ पत्ति हो गए और इनके कार्यकर्ता भी महंगे गाड़ियों में घुमते है.हमारा झारखण्ड प्राकृतिक संसाधनों से भरा पड़ा है,जंगलों में महुआ, ईमली,लाहा,तसर,साल लकड़ी, आयुर्वेदिक जड़ी बुटी से भरा पड़ा भरा परा है.तो दुसरे तरफ लौह आयस्क, कोयला चुन्ना पथड़ व वॉक्साईड,तांबा,यूरेनियम जैसे किमती पथड़ जिसके खान से केंद्र व राज्य सरकार अपनी तिजोड़ी भर रही है.खन्न माफिया खरबों का मालिक बन रहें है.और टाटा रूंगटा.बिड़ला को कौन नहीं जान रहा है.जो धनपत्ति बन गये है लेकिन जो इस संपदा का मालिक है 35 किलो अनाज के लिए हर महिना लाईन लगते हैं लेकिन जहां टाटा रूंगटा और एसीसी अन्य कंपनियों का खद्यान है और टिवी एनएल पावर प्लांट लाल पनिया है वहां के जमीन मालिक फटे हाल हैं और अपने हक अधिकार के लिए लगातार आंदोलन करने को मजबुर है.जंगल क्षेत्र में रह रहे लोग वन पट्टा और रोजगार के लिए लकड़ी दातुन तथा पत्ता हड़िया बेचने को मजबुर है.अगल लकड़ी बेचने में वन विभाग पकड़ लेते है जेल भेज देतें है.रोजगार के लिए दुसरे राज्यों में प्लाईन कर रहें है.और मजदुर न्यूनत्तमम मजदूरी 295 रूपये के लिए लगातार आंदोलन कर रहे है,लेकिन किसी सरकार ने इनकी दर्द को नहीं सुन रहे है.एक और सालखन मुर्मू सीएनटी,एसपीटी,एसीटी और डोमेसाईल के मुद्दो पर हलाल जरूर करते है.आदिवासी जमीन और नौकरी तो नहीं बचा पाया लेकीन टाटा और रूंगटा के लिए सुरक्षा कब्च जरूर बने हुए है.ऐसा नहीं तो आज तक टाटा रूंगठा के बिरूध कोई आंदोलन क्यों नहीं किया.एक ओर भाजपा से टिकट मिलने की उम्मीद में भाजपा में चले जाते है.नहीं मिलने पर दिखावा कर गाली देतें है.उनका दोहरा चरित्र आदिवासी मुलवासियों के भविष्य को खतरें में खड़ा करके जेएमएम को आदिवासी समुदाय अपना पार्टी समझती थी, लेकिन कुड़मी को आदिवासी बनाने को समर्थन में साफ हो गया.कि जेएमएम को किसी भी प्रकार से सत्ता चाहिए.कहा कि हम कुड़मियों के बिरोध मे नही है.लेकिन शैलेंद्र महतो और सालखन मुर्मू दोनों झारखण्ड को गलत दिशा में लेकर अशांत करने में लगें है.जबकी झारखण्ड में ईशाई और सरणा और कुड़मी ऐकता से ही विकास संभव है.तिनों एक हो जाय तो अलग झारखण्ड को भारत का सबसे धन्नी राज्य बनने से कोई नहीं रोक सकता.राजनितिक सिकार होने के कारण आज झारखण्ड का सपना पुरा नहीं हो पाया.हमारा संगठन मजदुर किसान और आदिवासी मुद्दे पर लगातार पश्चिमी सिंहभूम, लोहरदग्गा,गुमला,लातेहार,चतरा,हजारिबाग,बोकारो,रांची रामगढ़ जिला और ओड़िसा के बड़बिल क्षेत्र में हो रहे शोषण व जुल्म तथा हक अधिकार की लड़ाई लड़ रहें और शेर की दांत गीन रहें है.हमार समझ है कि जब तक आर्थिक विकास नहीं होता है तब तक समाज का विकास संभव नहीं है.इसलिए मजदुर आंदोलन को जारी रखा हुं और इस आंदोलन जोन मिरल मुण्डा पश्चिमी सिंहभूम सानिया उरांव लोहरदगा को जेल भेजने मान सिंह तिरिया पश्चिमी सिंहभूम पर केश लगा कर परेशान करना निखिल सोरेन बोकारो, जकरियस किस्पोट्टा बड़बिल ओड़िसा पर जान लेवा हमला का घटना हो चुका है,परंतु हमारा संगठन जबतक पांचवी,छवीं अनुसूची के तहत भाषा संस्कृती धर्म का रक्षा व विकास!किसानों के क्षेत्र में पानी,आदिवासी को रोजगार तथा मजदुरों को सम्मान जनक मजदुरी व जंगल में रह रहें आदिवासियों को वन पट्टा खन्न क्षेत्र में समता जजमेंट लागु हो और कुजी डैम व बिस्थापित ग्रामीणों का पहले पुर्नवास नहीं होता है तब तक आंदोलन जारी रहेगा.