मेदिनीनगर। मासिक पत्रिका सुबह की धूप के सात वर्ष पूरा होने पर सेमिनार का आयोजन किया गया ।

मेदिनीनगर। मासिक पत्रिका सुबह की धूप के सात वर्ष पूरा होने पर सेमिनार का आयोजन किया गया । 

रविवार को नए परिसदन भवन के सभागार में पत्रकारिता की चुनौतियां विषय पर आयोजित सेमिनार में वक्ताओं ने पत्रकारिता के इतिहास और वर्तमान संदर्भो की चर्चा की । कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ श्यामदेव मेहता व संचालन शिव शंकर प्रसाद ने किया। इसके अलावे मंच पर डॉ कुमार विरेन्द्र, पत्रकार राणा अरुण सिंह, अरुण शुक्ला, शैलेन्द्र कुमार, पंकज श्रीवास्तव व विकेश शुक्ला मौजूद थे। मौके पर पत्रिका के संपादक शिव शंकर प्रसाद ने  पत्रकारिता के शुरुआती दौर के संघर्ष और चुनौतियों की चर्चा करते हुए कहा के पत्रकारिता वर्तमान दौर में ही नहीं शुरू से ही चुनौती भरा रहा है । एक पत्रकार को हर रोज नई नई चुनौतियों से  संघर्ष करना पड़ता है । इसके बावजूद वह अपने कार्यों के प्रति अडिग होते हुए इसको अंजाम देता है ।  

सेमिनार के मुख्य वक्ता डॉ कुमार वीरेंद्र ने कहा के पत्रकारिता के अलग-अलग माध्यम हैं और सभी की चुनौतियां भी अलग-अलग है । प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया की अपनी-अपनी चुनौतियां है । उन्होंने कहा कि गुलाम भारत की पत्रिकाओं की चुनौतियां से अब के पत्रकार और पत्रकारिता को समझने की जरूरत है । उन्होंने कहा कि सुबह की धूप ने पत्रकारिता में नया आयाम स्थापित करते हुए एक नए विमर्श को जन्म दिया । पलामू में लघु पत्रकारिता की भी परंपरा रही है । उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का वर्तमान दौर में एक बड़ी चुनौती सोशल मीडिया से भी है। 


मौके पर शैलेंद्र कुमार ने कहा कि पत्रकारिता सामूहिक विवेक का प्रतिनिधित्व करता है ।  पत्रकारिता सिर्फ नौकरी नहीं एक जज्बा है। समाज व राष्ट्र को भी प्रभावित करता है ।

वरिष्ठ पत्रकार गोकुल वसंत ने कहा कि पत्रकारिता का चरित्र शुरू से ही जनपक्षीय रहा है । एक पत्रकार के पास असीमित ताकत होती है।  इस ताकत का इस्तेमाल सब अपने अपने तरीके से करते हैं । उन्होंने पत्रकारिता के इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डाला कहा कि पत्रकारिता को बेहतर समाज निर्माण के लिए औजार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है । 


पंकज श्रीवास्तव ने कहा कि पत्रकारिता के दौर में तेजी आई है।  लेकिन वर्तमान समय में यह संकट में पड़ा है । अब पत्रकार सत्ता के पैरोकार  बन गए हैं । वर्तमान में समय की मांग है कि वैचारिकता को आधार बनाकर पत्रकारिता के स्तंभ को मजबूत किया जाए ।


 इसके अलावा शब्बीर अहमद, सुरेश सिंह, राणा अरुण सिंह, प्रेम भशीन, अश्विनी कुमार घई, वंदना कुमारी, प्रेम प्रकाश, भोला महतो, गणेश रवि, संतोष मखाडिया, मनीष कुमार आदि ने भी अपने विचार रखें । स्वागत भाषण अभय वर्मा ने दिया । धन्यवाद ज्ञापन रामनुग्रह सिंह ने किया ।


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कार्यक्रम के दौरान सुबह की धूप पत्रिका के स्थापना विशेषांक का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया । साथ ही सुबह की धूप पोर्टल को भी लॉन्च किया गया । संत मरियम आवासीय विद्यालय के निदेशक अविनाश देव ने पोर्टल को लॉन्च किया । इसके पूर्व पत्रिका परिवार की ओर से युवा कवि विनोद सागर को शॉल व मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया । संध्या में कवि सम्मेलन सह मुशायरा का आयोजन हुआ ।