जो पटरी से उतर जाए उसे पटरौल कहते हैं क्या ? लेखक -डा. अरूण कुमार सिंह----


- डा. अरूण कुमार सिंह ---------_

मैं अर्थशास्त्री नहीं हूँ । न ही मुझे अर्थशास्त्र की रत्ती भर समझ है । फिर भी यह लिख रहा हूं । इसलिए लिख रहा हूं कि इस पेट्रोल ने अब लोगों का पिछवाड़ा तक जलाना शुरू कर दिया है ...

मैंने संबद्ध आंकड़े नेट से उठाये हैं । किन्हीं को आपत्ति हो तो उन्हें तथ्यात्मक आंकड़े प्रस्तुत करने चाहिये 



2008 में क्रूड ऑयल की कीमत 141.38 डॉलर बैरल थी। करीब 6 सालों तक क्रूड ऑयल की कीमतों में इजाफा ही रहा। या यूं कहें कि 2008 से 2014 के बीच पांच साल ऐसे रहे जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल कीमत 100 डॉलर बैरल से अधिक रही। सिर्फ 2009 में और 2010 दो ऐसे साल रहे जब क्रूड ऑयल मार्केट में 100 डॉलर बैरल कम में मिला। लेकिन कीमत 70 डॉलर बैरल अधिक ही रही। उसके बाद 2015 से लेकर 2018 में अब पेट्रोल के दाम आधे से भी कम हो चुके हैं। मौजूदा समय में क्रूड ऑयल की कीमत 64.14 डॉलर बैरल हो गई है।


सरकार का लॉजिक सुनिये । सरकार कहती है कि इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ती हैं तो पेट्रोल डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी होना लाजिमी है। लेकिन यहां इसके कुछ उलट हुआ है। क्योंकि बीते दस सालों में जहां क्रूड ऑयल की कीमतों में आधे से ज्यादा की कटौती हुई है, वहीं दूसरी ओर पेट्रोल के दाम डेढ़ गुना और डीजल के दाम दोगुना हो चुके हैं।


अब यह सोचने वाली बात है कि जब आज भी कच्चे तेल की कीमतें कम हैं तो पेट्रोल और डीजल के दामों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी क्यों की जा रही है? अब इस गणित को ऐसे समझते हैं। सरकार जो हमें पेट्रोल मुहैया करा रही है उसमें केंद्र का टैक्‍स 19.48 रुपये और राज्यों का 15.02 रुपये है। यानि पेट्रोल पर हम सभी 35.02 रुपये टैक्स दे रहे हैं। वहीं बात अगर डीजल की करें तो सरकार पब्लिक से 24.77 रुपये टैक्स वसूल रही है। जिसकी वजह से क्रूड ऑयल की कीमतें कम होने के बाद भी पब्लिक को महंगा पेट्रोल डीजल खरीदना पड़ रहा है।


अब जरा सोचिए अगर 2008 के क्रूड ऑयल की कीमत 141 डॉलर बैरल यूं ही 2018 तक रहता तो आज की डेट में पेट्रोल की कीमतें 100 से 125 रुपए लीटर होती। यह बात हम नहीं बल्कि एक्सपर्ट कह रहे हैं। जब इस बारे में ऑल इंडिया पेट्रोल पंप एसोसिएशन के प्रेसीडेंट अजय बसंल से किसी ने बात की थी तो उन्होंने कहा था कि 2008 में मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों के बावजूद सस्ता पेट्रोल डीजल मुहैया करा रही थी । उस वक्त की सरकार घाटा झेल रही थी ताकि लोगों को सस्ता पेट्रोल डीजल मिले। लेकिन मौजूदा सरकार पेट्रोल डीजल पर घाटा उठाने को तैयार नहीं है। जिस वजह से पेट्रोल डीजल के रेट बढ़े हुए हैं। उन्‍होंने आगे कहा कि अगर मौजूदा समय में 141 डॉलर बैरल होता तो पेट्रोल की कीमत 100 रुपये से ऊपर हो गई होती।


तो, सारांश यह कि आज आप भी अपने भरोसे हैं और देश के वे तमाम किसान भी जो डीजल जलाकर अन्न उगाते हैं ।


आपको यह जानने का हक है कि जो सरकार किसानों के लिए कम दाम पर पेट्रोल मुहैया नहीं करवा सकती, वह अरबपति उद्योगपतियों को हर साल कितने का कर्ज माफ करती है ? 


फिर, पेट्रोल और डीजल पर बेतहाशा मूल्य वृद्धि का असर समग्र अर्थव्यवस्था पर पड़ता है और हर चीजें महंगी हो जाती हैं, यह कौन नहीं जानता ?


तो, जान बूझकर अर्थव्यवस्था को खाई में काहे धकेल रहे हो प्रभु ?