टाटा स्टील ने झारखंड और ओडिशा में ग्रीन स्कूल प्रोजेक्ट के लिए टीईआरआई (टेरी) के साथ किया समझौता और ज्ञापन पर किया हस्ताक्षर o डॉ अजय माथुर, डीजी, टेरी और श्री चाणक्य चौधरी, वीपी, रॉ मैटेरियल, टाटा स्टील ने ग्रीन स्कूल प्रोजेक्ट के चरण- 2 के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किया प्रोजेक्ट झारखंड और ओडिशा राज्यों में 30 स्कूलों में लागू किया जायेगा


संतोष वर्मा। टाटा स्टील ने झारखंड और ओडिशा में ग्रीन स्कूल प्रोजेक्ट के दूसरे चरण के लिए ऊर्जा और संसाधन संस्थान (एनर्जी ऐंड रिर्सोसेज इंस्टीट्यूट- टेरी) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया।

समझौता ज्ञापन के तहत, ग्रीन स्कूल प्रोजेक्ट स्कूल और स्कूल परिसर के आसपास व्यावहारिक पर्यावरणीय प्रभाव प्राप्त करने के कार्य में स्कूल बिरादरी को शामिल करने पर केंद्रित होगा।

प्रोजेक्ट जलवायु परिवर्तन पर विद्यार्थियों के बीच जागरूकता पैदा करेगा। टिकाऊ जीवनशैली के तरीके जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने में मदद कर सकते हैं। यह उनकी महत्वपूर्ण, अंतःविषय और समग्र सोच को बेहतर बनाने के लिए कक्षा और बाहरी गतिविधियों, दोनों के माध्यम से पर्यावरणीय प्रबंधन को बढ़ावा देकर हासिल किया जाएगा।

आज नई दिल्ली में डॉ अजय माथुर, डीजी, टीईआरआई और श्री चाणक्य चौधरी, वीपी, रॉ मैटेरियल्स, टाटा स्टील द्वारा समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया। इस अवसर पर टीईआरआई की सीनियर डायरेक्टर डॉ अन्नपूर्णा वांचेस्वरण और सुश्री नेहा के साथ टाटा स्टील के कई अधिकारी भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर श्री चाणक्य चौधरी ने कहा, “टाटा स्टील एक समग्र टिकाऊ वातावरण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस पहल के साथ, हम पर्यावरण संरक्षण पर विद्यार्थियों को जागरूक करना और उन्हें अपने दैनिक जीवन में टिकाऊ (सस्टेनेबल) अभ्यासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं। 10 स्कूलों में चरण-1 के कार्यान्वयन की सफलता के साथ, हम इस पहल को 20 अतिरिक्त स्कूलों में ले जाने को लेकर काफी उत्साहित हैं और पर्यावरण पर विद्यार्थियों व शिक्षकों को संवेदनशील बनाने और उन्हें हरियाली हेतू ठोस कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।’’

दूसरी ओर टेरी के डॉ माथुर ने कहा, “हमें टाटा स्टील के सहयोग से ग्रीन स्कूल प्रोजेक्ट शुरू करने और पर्यावरण की दिशा में विद्यार्थियों की जीवनशैली में बदलाव लाने में बेहद प्रसन्नता हुई है। हमें न केवल प्रौद्योगिकी और वित्त के क्षेत्र में, बल्कि ग्रीन स्कूल प्रोजेक्ट के माध्यम से उन्हें आरंभिक युवावस्था में ही साथ ले कर सस्टेनेबिलिटी को तेजी देने पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। इस बात को हम बहुत महत्व देते हैं और यह देश के दूरस्थ स्थानों पर हमारे प्रभाव को बढ़ाने का एक बड़ा अवसर है।“

प्रोजेक्ट के चरण-1 के सफल समापन के बाद, चरण-2 जाजपुर, झरिया, जोडा, नोआमुंडी, सुकिंदा और वेस्ट बोकारो के 30 स्कूलों में लागू किया जाएगा। प्रोजेक्ट की शुरुआत के बाद से 2,700 से अधिक विद्यार्थियों  पर असर पड़ा है और 66 शिक्षकों को पर्यावरण परिवर्तन और स्थायित्व पर प्रशिक्षित किया गया है।

प्रोजेक्ट का दूसरा चरण शिक्षा, परियोजना आधारित शिक्षा और सामुदायिक सेवा के माध्यम से अगली पीढ़ी को सशक्त बनाने में मदद करेगा। विद्यार्थी स्कूल के भीतर और उनके आसपास पर्यावरण के लिए टिकाऊ समाधान विकसित करने के कार्य से जुड़ेंगे, जिसका प्रतिफल बाद में संसाधन-कुशल स्कूलों की स्थापना के रूप में सामने आयेगा।