एक तरफ गर्मी से बेहाल वही बस्तियां मैं बुंद बुंद पानी के लिए मचा हाहाकार

झारखंड--




जमशेदपुर :- लौहनगरी जमशेदपुर शहर मे  आसमान से आग उगल रहा हो। वही निचे ज़मीन पर लोग गर्मी से बेहाल है। उधर कइ एैसी बस्तियां है जहां  रहने वाले लोगों ने बुंद बुंद पानी के लिए तरस रहें है।यह जो नजारा आप देख रहें है वह राज्य के मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री की गृह जिले का यह हाल है. जहां गैर टिस्को इलाकों के साथ साथ मानगो, बागबेड़ा, परसुडीह, गोविन्दपुर, गदड़ा, सहीत बिरसानगर में भी लोगों को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। यहां तक की स्कूल के बच्चे स्कूल छोड़ अपने घर में एक एक बुंद पानी के लिए टैंकर पर लाइन लगा कर खड़ा दिखायी देतें नजर आतें है। इतना ही नहीं लोगों को अपने घर से दो तीन किलो मिटर दुर जा कर पानी लाने के लिए जाना पड़ता है।इस नजारा को देख कर आप खुद ही अनुमान लगा सकतें है कि सरकार का कथनी और करनी में क्या फर्क है। इन इलाकों में जाने के बाद सरकार के वे तमाम बड़े बड़े दावे फेल होता नज़र आ रही है। बस्तीयों में लगे सभी सरकारी चापा कल पुरी तरह सुख चुकें है और नहीं तो वे सभी खराब पड़ें है। वहीं अगर शहर में गर्मी की बात करें तो पारा 42 डिग्री के पार जा चुका है। शहर की लाइफ लाइन कही जाने वाली स्वर्ण रेखा और खरकई नदी सूख गई है। जिससे इस नदी पर आधारित लोखों लोगो के बिच पानी के लिए तरस रहे है. नदी सूखते ही शहर के तमाम बस्तियों के चापाकाल और डीप बोरिंग सूख गए है।वैसे तो जमशेदपुर शहर को देश को रैकिंग में बेहतर रैंक हासिल होता आया है महज़ कागजों पर।पानी के बिना जिंदगी चल नहीं सकती है. मजबूरी ही सही लेकिन लोगो के पास इस तकलीफ को सहने के अलावा कोई और रास्ता भी नही है ।