छठ पूजा में इस्तेमाल प्रत्येक सामग्री बढ़ाता है इम्यून सिस्टम

छठ पूजा में इस्तेमाल प्रत्येक सामग्री बढ़ाता है इम्यून सिस्टम

रांची :छठ का जितना धार्मिक महत्व है उतना ही इसका वैज्ञानिक महत्व भी है। यह पावन त्योहार पर्यावरण संरक्षण का संदेश तो देता ही है त्योहार में इस्तेमाल होने वाली पूजन सामग्री इम्युनिटी बढ़ाने के साथ- साथ शरीर को स्वस्थ्य रखने में भी काफी कारगर है

इस त्योहार में हलदी, मूली, गाजर, आवंला, नींबू और दूसरे गुणकारी फलों और सब्जियों से अर्घ्य दिया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए काफी लाभप्रद हैं।

सूप पर इस्तेमाल आंवला औषधि के रूप में शरीर में उर्जा प्रदान करता है। आंवला में कैलसियम तो है ही इसमें कई विटामिन भी है जो कि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। गन्ना के रस, और गुड़ से शारीरिक क्षमता बढ़ती है। नारियल का पानी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है साथ ही यह पेट के लिए फायेदमंद भी है। छठ में ऐसे स्थानीय और दूसरे फलों का इस्तेमाल होता है जिसमें काफी औषधीय गुण है। छठ में इस्तेमाल होने वाले सामग्री और फल सेहत के लिए काफी फायदेमंद होने की बात चिकित्सक और वैज्ञानिक भी मानते हैं। हल्दी, आंवसा, गुड़, गाजर, मूली, मकोई से इम्युनिटी बढ़ने की पुष्टि चिकित्सक भी करते हैं---साइंटिफिक भी है छठ वैज्ञानिकों का मानना है कि कमर तक डूब कर सूर्य को देखना स्वास्थ्यवर्धक है। इससे डी टॉक्सीफिकेशन की प्रक्रिया होती है। पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, इससे सूर्य की किरणों का आंखों से सीधा संपर्क होता है। इन किरणों में 16 कलाए होंती हैं। जैसे रिप्लेक्शन, रिफ्रेक्शन, डेविएशन, स्कैटरिंग, डिस्पर्शन,वाइब्रेशन आदि। लोटे से गिरती जल की धार से परिवर्तित होकर आंखों तक पहुंचने वाले सूर्य की किरणों से स्नायुतंत्र सक्रिय होते हैं। दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ती है।---स्वच्छता का प्रतीक यह त्योहार स्वच्छता का प्रतीक भी है। यह हमें शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण करने की प्रेरणा देता है। प्रकृति के संरक्षण के साथ- साथ यह त्योहार आंवला, मकोई, मूंगफली, जैसे फलों का महत्व बताते हुए इन फलों और वृक्षों के संरक्षण का संदेश भी देता है।आंवला, नींबू मकोई, जाफर शरीर के लिए काफी फायदेमंद हैं। औषधीय पौधों और वृक्षों को भी इस महापर्व से इसी उद्देश्य से जोड़ा गया है।विज्ञान की नजर में छठ-कार्तिक माह में सूर्य कि किरणों में प्रचुर मात्रा में विटामिन डी का समावेश होता है-ये किरणें सूर्योदय और सूर्यास्त के समय अधिक प्रभावी होती हैं-पूजा में इस्तेमाल खाद्य पदार्थों और फलों में प्रचुर मात्रा में कैलशियम रहता है-उपवास के समय प्राकृतिक कैलसियम अवशोषित हो जाते हैं इससे शरीर में इनका संतुलन बना रहता हैपर्यावरण का संदेश--छठ में ऐसा कोई काम नहीं होता जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचे-प्रकृति से जुड़े हर पहलू को छूता है-आंवला, मकोई, नींबू जैसे औषधीय पौधे का महत्व भी बताया है-नदी,तालाबों को स्वच्छ रखने और उनके संरक्षण का संदेश भी देता