डीएलएड नामांकन में हुई बड़े पैमाने पर हुआ फर्जीवाड़ा



आदिवासी सेंगेल अभियान ने की उपायुक्त से मामले की जांच करने की मांग


फर्जीवाड़ा में शामिल हेडमास्टर व बीईईओ पर कानुनी कार्रवाई करने की मांग


मामले की जांच नहीं हुई तो आदिवासी सेंगल अभियान करेगी आंदोलन


संतोष वर्मा, जगन्नाथपुर भास्कर न्यूज। पश्चिमी सिंहभूम जिले में डीएलएड नामांकन में बड़े पैमानें पर फर्जीवाड़ा किये जाने का मामला प्रकाश में आया है.वहीं इस मामले को लेकर आदिवासी सेंगेल अभियान के जिला संयोजक बिरेंद्र बालमुचू ने मंगलवार को उपायुक्त को मांग पत्र दिया गया है.साथ ही श्री बालमुचू नें मामलें की जांच करने की मांग उपायुक्त से की है.ज्ञांत हो की एनआईओएस के तहत सेवारत्त शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए ही डीएलएड कोर्स में हुए नामांकन में जिले में व्यापक फर्जीवाड़ा हुआ है.गैर पारा सेवारत्त शिक्षक जो पब्लिक स्कूलों में सेवा दे रहें है.उन्हें भी सरकार के आदेश के आलोक में एमआईओएस से डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त करना है.जिले में निर्धारित लक्ष्य से अधिक नामांकन हुआ है. ऐसा ही घटना सरायकेला खरसंवा जिले में भी हो रही है.वहां की जिला शिक्षा अधिक्षक ने टीम गठित विद्यालयवार धरातल में जांच करने का आदेश दिया है. तो फिर हमारे जिले में जांच क्यों नहीं हो रही है.शिक्षकों को प्रशिक्षण दिलाने को लेकर निजी व सरकारी विद्यालयों में कार्यरत्त अप्रशिक्षित शिक्षकों की सूची को लक्ष्य बनाया गया था.लेकिन डीएलएड कोर्स के लिए निजी स्कूलों द्वारा शिक्षकों की सूची में काफी अंतर है.निजी विद्यालयों में प्रधान शिक्षक, स्कूल संचालक और बीईईओ की साठ गांठ से जमकर फर्जी फर्जीवाड़ा हुआ है.आखिर निर्धारित लक्ष्य से अधिक शिक्षक प्रशिक्षण कैसे प्राप्त कर रहे हैं.चिंता का विषय है.घटना की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए. जबकी सपष्ट आदेश है आरटीआई से स्कूल की मान्यता मिलने के समय कार्यरत शिक्षकों की सूची के अनुसार प्रशिक्षण दिलाना है. विभाग स्कूलों द्वारा यू डाईस बजट प्रपत्र और शिक्षक पद स्थापना विवरणी के पिछली दो तीन वर्षो के आकड़ो का संधारण करे.आरटीआई के समय शिक्षकों की सूची नामांकन से पूर्व शिक्षक पदस्थापना विवरणी की सूची और विद्यालयवार निजी स्कूलों से डीएलएड में नामांकित शिक्षकों की सूची का संधारण किया जाए. तो भारी विसंगति मिलेगी.बिडबना इस बात की है जिसने कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा वह भी किसी स्कूल में सेटिंग कर फर्जी गुरूजी बन कर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है.जब प्रशिक्षण की बुनियाद ही भष्टाचार की चपेट में हो तो आगे क्या होगा.निजी स्कूलों में इन शिक्षकों की भौतिक जांच हो.बच्चों से पूछा जाए बच्चों की कॉपियां जांच की जाए.बच्चों से पूछा जाए उपस्थिति पंजी के साथ वेतन भुगतान देखा जाए. केश बुक और खाता की जांच की जाए तो दर्जनों फर्जी प्रशिक्षुओं का पर्दाफाश होगा. साथ ही यह भी बताया गया की मामलों कों गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय जांच कर फर्जीवाड़ा करने वालों के बिरूद्व कठोर कार्रवाई करें.साथ ही संलिप्त विद्यालयों की मान्यता रद्द की जाए.फर्जीवाड़ा में शामिल हेडमास्टर और बीईईओ पर कानूनी कार्रवाई की जाए. यदी जांच नहीं हूई तो इस मामले को लेकर आदिवासी सेंगल अभियान वृहत पैमाने पर आंदोलन करेगी.इस मामले को लेकर शिकायत पत्र मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री,मुख्य सचिव, आरडीडी चाईबासा व जिला शिक्षा पदाधिकारी को दी गई है.