कोई भी गरीब भूखा नहीं रहे, इसके लिए कार्ड नहीं रहने पर भी मिलेगा राशन

कैबिनेट बैठक : कोई भी गरीब भूखा नहीं रहे, इसके लिए कार्ड नहीं रहने पर भी मिलेगा राशन

_रांची.  कोई भी गरीब भूखा नहीं रहे, इसके लिए राज्य सरकार ने झारखंड राज्य आकस्मिक खाद्यान्न कोष का गठन किया है। इसमें आकस्मिकता निधि से 6.67 करोड़ की राशि उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। इस राशि से वैसे निर्धन असहाय व्यक्ति, जो स्वयं या उसके साथ रहनेवाला कोई भी व्यक्ति जीविकोपार्जन करने में असमर्थ है, को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाएगा।_

सरकार का है मानना

_सरकार का मानना है कि गरीबों को आर्थिक सामाजिक गणना के आंकड़े के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के दायरे आच्छादित कर दिया गया है। इसके बावजूद भी कुछ ऐसे परिवार या व्यक्ति हैं जो छूट गये हैं। उन्हें भी खाद्यान्न उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से कोष के गठन संबंधी प्रस्ताव पर मंगलवार को कैबिनेट की मंजूरी दी गयी। यह जानकारी कैबिनेट के प्रधान सचिव एसकेजी रहाटे व खाद्य आपूर्ति सचिव अमिताभ कौशल ने दी।_

◼ कैसे मिलेगा गरीबों को खाद्यान्न और पैसा कहां से आएगा*_◼

रखंड राज्य आकस्मिकता खाद्यान्न कोष से सभी पंचायतों व निकायों के वार्डों को 10-10 हजार रुपए उपलब्ध कराया जायेगा। इसके लिए पंचायतों को कुल 4.3 करोड़, निकाय के वार्डों को 1.08 करोड़ एवं 24 जिलों के उपायुक्तों को अलग से पांच-पांच लाख की दर से कुल 1.20 करोड़ की राशि उपलब्ध करायी जायेगी। इसके अलावा जिन निकायों में वार्ड का गठन नहीं हुआ है, उसे भी एक लाख रुपए दिये जायेंगे। इसके बाद  वार्ड पार्षद और पंचायत समिति जरूरत पड़ने पर किसी भी गरीब और असहाय व्यक्ति को 10 किलो खाद्यान्न उपलब्ध करायेंगे। उसके बाद उनका राशन कार्ड बनवायेंगे। अगर राशन कार्ड नहीं बना और किसी को फिर खाद्यान्न उपलब्ध कराने की आवश्यकता हुई तो दोबारा-तिबारा भी खाद्यान्न दिया जायेगा। वार्ड और पंचायत को राशि की कमी होने पर वह उपायुक्त से इसकी मांग कर सकेंगे।_

◼ पांच लाख तक की कच्ची और अर्द्ध कच्ची योजनाएं बनायेंगी ग्राम समितियां◼_                 ग्रामीण इलाके में स्थानीय जरूरत के मुताबिक विकास के छोटे-छोटे काम करने के लिए बनायी गयी ग्राम विकास और आदिवासी विकास समिति कौन सी योजनाएं लेंगी, उसे कैसे पूरा करायेंगी और पैसे कहां से आएंगे, इसकी मार्गदर्शिका को कैबनेट ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। योजनाओ का चयन ग्राम या आदिवासी विकास समिति की बैठक में किया जायेगा।  योजनाओं की अधिकतम लागत पांच लाख होगी। वे कच्ची या अर्द्ध कच्ची होंगी, जैसे बोराबांध, जल संचयन से जुड़ी संरचना, तालाब, आहर, डोभा, वृक्षारोपण या अन्य। इन योजनाओं के लिए टेंडर नहीं होगा। विभाग के स्तर से योजनाओं के लिए एक मॉडल स्टीमेट बनाया जायेगा। प्रखंड समन्वयक के संतुष्ट होने पर डीडीसी के स्तर से योजनाओं की स्वीकृति मिलेगी।_

◼ 15 दिन के अंदर 80 फीसदी राशि कराई जाएगी उपलब्ध◼

_योजना स्वीकृत होते ही 15 दिन के भीतर समिति के खाते में सरकार 80 फीसदी राशि उपलब्ध करायेगी। शेष 20 फीसदी राशि समिति को अपने स्तर से जुटाना होगा। समिति श्रम के माध्यम से भी 20 फीसदी की राशि जुटा सकती है। काम शुरू होने, 25, 50, 75 एवं 100 फीसदी काम पूरा होने पर उसका कुल पांच बार वीडियोग्राफी करायी जाएगी। उसे तैयार किये जा रहे पोर्टल पर डाला जायेगा। अनुश्रवण और पर्यवेक्षण की जिम्मेवारी ग्राम व आदिवासी विकास समिति की होगी। गुणवत्ता पर मुहर गांव के 10 व्यस्क व्यक्ति लगायेंगे। राशि के अपव्यय होने पर 75 फीसदी राशि समिति के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष से तथा 25 फीसदी राशि उसके सदस्यों से वसूल की जायेगी। राज्य स्तर पर मॉनिटरिंग के लिए पंचायती राज निदेशक की अध्यक्षता में एक चार सदस्यी कमेटी का भी गठन किया जायेगा।_

 @jharkhanddarpan

पंचायत और ग्राम समिति में विवाद से इंकार

_पंचायती राज सचिव विनय कुमार चौबे ने गावों में ग्राम या आदिवासी विकास समिति के माध्यम से विकास के काम कराये जाने में पंचायत और समिति के बीच किसी तरह की समस्या आने से इंकार किया। उन्होंने कहा कि समिति को सरकार अलग से पैसा देगी। यह राशि पंचायतों को 14 वें वित्त आयोग से मिलनेवाली राशि से अलग होगी