चुनाव नजदिक आते ही याद आने लगा जपला को भी जिला बनाना है। विपक्षी के सुर में ताल मिला रहा है सत्ता पक्ष भी

                 विपक्षी के सुर में ताल मिला रहा है सत्ता पक्ष भी
   चुनाव नजदिक आते ही  याद आने लगा जपला को भी जिला बनाना है।

पलामूः जपला को जिला का दर्जा दिलाने की मुहिम एकाएक परवान चढती नजर रही है। जबकि हुसैनाबाद को जिला बनाने के लिए 2008  तत्कालीन मंत्री कमलेश कुमार सिंह ने हैदरनगर, मोहम्मदगंज को प्रखंड का दर्जा दिलाया था। उन्होंने कामगारपुर दंगवार को प्रखंड बनाकर हुसैनाबाद को जिला का दर्जा देने का प्रस्ताव वर्ष 2008 में सरकार को दिया था। हुसैनाबाद अनुमंडल कार्यालय में एसपी डीसी का कैंप कार्यालय भी खुला था। अचानक सरकार गिरने की वजह से हुसैनाबाद जिला नहीं बन सका।  2019 में लोस विधान सभा चुनाव है। क्या विपक्षी,क्या सत्ता पक्ष सभी को एकाएक जपला को जिला बनाने की याद सताने लगी। माना जा रहा है कि जपला सीमेंट कारखाना हरेक चुनाव में मुद्दा रहता था। अब कारखाना निलाम हो चुका है। जपता का जनता को भरमाने के लिए जिला बनाने की मुहिम से बेहतर नेताओं को दूसरा मुद्दा नहीं सुझा। राष्ट्रीय जनता दल से लेकर झामुमो तक के लोग जपला को जिला बनाने की मुहिम में शामिल हो गये हैं। सर्वदलीय बैठक भी हुई। जिसमें भाजपा के भी कुछ लोग शामिल हुए। सर्वदलीय बैठक में 2 अगस्त को जयप्रकाष चैक के समक्ष एक दिवसीय धरना देने का भी निर्णय ले लिया गया। यह सब देख हुसैनाबाद के लोहरपुरा गांव निवासी वर्तमान में भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष ज्योतिरिश्वर सिंह से भी नहीं रहा गया। उन्होंने विभिन्न तर्कों के साथ जपला को जिला बनाने की बकालत से संबंधित पत्र मुख्यमंत्री को लिख दिया। इन सभी गतिविधियों से स्पष्ट हो गया है कि आगामी लोस विस चुनाव में जपला को जिला बनाने का मुद्दा प्रमुख होगा. जानकार लोगो ने बताया कि राज्य सरकार के गजट में जपला नाम का कोई स्थान है ही नहीं। कुछ कट्टर पंथी लोग हुसैनाबाद को गौन कर जपला नाम को प्रचारित कर रहे हैं। वह अपनी मनशा में कभी कामयाब नहीं होंगे। उन्होंने बताया कि हुसैनाबाद को जिला बनाने की मुहिम उन्होंने शुरु की थी। जिला का निर्माण भी वही करायेंगे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग छतरपुर को जिला बनाने की वकालत कर रहे हैं। छतरपुर और हुसैनाबाद में आसमान जमीन का अंतर है। हुसैनाबाद जिला बनने की सभी अहर्तायें पूरा करता है। इसके जिला बनने से इससे जुड़े प्रखंड के लोगों को सुविधा होगी। समय पैसा दोनो की बचत होगी। जबकि छतरपुर के जिला बनने से सिर्फ छतरपुर के लोगों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि छतरपुर के लोगों को 50 किलो मीटर दूर डालटनगंज जाना पड़ता है। उन्हें भी हुसैनाबाद जिला में शामिल होने की मुहिम चलाना चाहिए। क्योकि छतरपुर से हुसैनाबाद की दूरी सिर्फ 28 किलो मीटर है।