बदला-बदला यह हिंदुस्तान लग रहा है

बदला-बदला यह हिंदुस्तान लग रहा है


कुछ अज़ीब, कुछ अंज़ान लग रहा है,

बदला-बदला यह हिंदुस्तान लग रहा है।


देश में ग़रीबी, भुखमरी व बदहाली है।

धमाकों के ज़द में शामिल दीवाली है।

विषमता है  विकास का  पैमाना यहाँ,

ज़वाब की  तलब में  खड़ा सवाली है।

कुछ ठीक नहीं विधि-विधान लग रहा है,

बदला-बदला यह हिंदुस्तान लग रहा है।


गलियों में जाओ, तो कुत्ते भौंकते हैं।

सड़कों पर निकलो, तो भेड़िये नोंचते हैं।

सुरक्षित नहीं अब बेटियाँ कहीं पर भी,

अक़्सर रात को पापा यही सोचते हैं।

ग्रहण के घेरे में कन्यादान लग रहा है,

बदला-बदला यह हिंदुस्तान लग रहा है।


जिसके पास पैसा है, उसे भूख नहीं है।

जिसे भूख है, उसे पैसे का सुख नहीं है।

पी रहा पीड़ा का समुंदर अंदर-ही-अंदर,

जो कह रहा कि उसे कोई दुःख नहीं है।

जिसे देखिए, आज परेशान लग रहा है,

बदला-बदला यह हिंदुस्तान लग रहा है।


इंसान भूखे मरे, गाय पर राजनीति करो।

देश भांड में जाये, चाय पर राजनीति करो।

पक्ष-विपक्ष दोनों मतलबपरस्त पार्टियाँ,

माल्या-नीरव भागें, रॉय पर राजनीति करो।

राजनीति का गलियारा, शमशान लग रहा है,

बदला-बदला यह हिंदुस्तान लग रहा है।


सैनिकों की लाश पर राजनीति बन्द करो।

युवाओं की आस पर राजनीति बन्द करो।

उम्मीद की किरणें निकलती हैं सहमकर,

अब सूरज-चाँद पर राजनीति बन्द करो।

कि वीरों का देश, कोढ़-समान लग रहा है,

बदला-बदला यह हिंदुस्तान लग रहा है।


-विनोद सागर, 07050761775 -----