हैदरनगर- हमिदुर्रहमान आराम की जिंदगी त्याग कर कर रहे हैं पर्यावरण संरक्षण

         कौन कता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो

               हैदरनगर हमिदुर्रहमान आराम की जिंदगी त्याग कर कर रहे हैं पर्यावरण संरक्षण

जफर हुसैन

हैदरनगर,पलामू- विदेश में बड़े बड़े पद पर रहकर आराम आशाइश का जीवन बिताने वाले शैख हमिदुर्रहमान सिद्दीकी ने मोहम्मदगंज प्रखंड के एक छोटे से गांव में कठिन परिश्रम कर पर्यावरण की रक्षा के साथ साथ लोगों को प्रेरित भी कर रहे है। उन्होंने बताया कि दिल्ली भोपाल में उनका घर है। भोपाल में उनके पुत्र का बहुत बड़ा फार्म हाउस है। जिसमें पेड़ पौधों के अलावा विभिन्न पशु, पक्षी मतस्य पालन की भी सुविधा है। शैख हमिदुर्रहमान सिद्दीकी की उम्र करीब 65 वर्ष है। उन्होंने बताया कि वह चाहते तो आराम की जिंदगी व्यतीत कर सकते थे। उन्होंने बताया कि उनके पैतृक  ग्राम तारा के आस पास की सैकड़ों एकड़ भूमि बंजर रहती थी। इसे देखकर उन्हें काफी दुःख होता था। वह चाहते हैं कि लोग बेकार नहीं रहें। पढ़ाइ करने के बाद लोग खेती की तरफ अपना रूख करें। उन्होंने निर्णय लिया कि वह अपनी सात एकड़ जमीन में इंटिग्रेटेड फार्मिंग का काम कर लोगों को प्रेरित करेंगे। उन्होंने 2011 में अपनी जमीन में जब बोरिंग कराना शुरू किया तो लोगों ने उन्हें पागल कहना शुरु कर दिया। उन्होंने हार नहीं माना। बोरिंग में पर्याप्त पानी निकला। वहीं से शुरु हुआ फार्मिंग की दूसरी पाली। क्युंकी उन्होंने सउदी अरबिया में एक कंपनी के साथ इंटिग्रेटेड फार्मिंग का काम किया था। आज भी आस्ट्रेलिया सउदी अरबिया से उन्हें बुलावा आता है। उन्होंने 23 मार्च 2011 को भूमि की घेराबंदी कराकर उसमें पौधा रोपण तालाब निर्माण का काम शुरु कर दिया। जो उन्हें पागल कहते थे। अब वह यह सब देखकर हैरान है। हमिदुर्रहमान ने बताया कि उन्होंने इंटिग्रेटेड फार्मिंग में करीब डेढ़ करोड रुपये खुद के लगा चुके हैं। आज फर्म हाउस में 500 फलदार वृक्ष के अलावा मुर्गी पालन, पशु पालन,मतस्य पालन के अलावा बहुत सारे संबंधित कार्य हो रहे हैं। अभी फर्म हाउस के पास दो तालाब तीन पम्प हाउस भी हैं। सब्जीयों के अलावा, धान, गेहुं दलहन की खेती भी होती है। उन्होंने बताया कि उन्हें देखकर आस पास के किसानो ने भी वैसा ही करना शुरु कर दिया। जो जमीन सैकड़ों वर्ष से बंजर थी। आज उसमें पेड़ों के अलावा धान, गेहुं दलहन की खेती होने लगी है। उनके बाद आस पास के किसानो ने करीब 15 पम्प लगवाया। आज सभी खुशहाल हैं। उन्होंने बताया कि वह किसानो को जानकारी मुफत देते हैं। जल्द ही किसानो को प्रशिक्षण देने का काम वह हैदरनगर में शुरु करेंगे। उन्होंने अफसोस जाहिर करते हुए