पलामू -यह निविर्वाद सत्य है कि वैज्ञानिक चिंतन ही खुबसूरत समाज का आधार स्तंभ है। जब तक हमारा समाज वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुरूप आगे नही बढ़ेगा तब तक हम अंधविश्वास से मुक्ति नही पा सकते है। हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत के हिफाजत के लिए चिंतनशील, प्रगतिशील, रोजगारन्नोमुखी समाज बनाना होगा। इसके लिए साहित्य विज्ञान, कला के क्षेत्र में निरंतर शोध कर आगे बढ़ना ही होगा।

पलामू -यह निविर्वाद सत्य है कि वैज्ञानिक चिंतन ही खुबसूरत समाज का आधार स्तंभ है। जब तक हमारा समाज वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुरूप आगे नही बढ़ेगा तब तक हम अंधविश्वास से मुक्ति नही पा सकते है। हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत के हिफाजत के लिए चिंतनशील, प्रगतिशील, रोजगारन्नोमुखी समाज बनाना होगा। इसके लिए साहित्य विज्ञान, कला के क्षेत्र में निरंतर शोध कर आगे बढ़ना ही होगा। अगर हम अंधविश्वास अफवाह के मकड़जाल में फसते है तो हम आगे बढ़ने के बजाय जड़ता के शिकार हो जायेंगे और फिर आनेवाली पिढ़ी के लिए रास्ता मुश्किल होता चला जायेगा। इसलिए हम सभी मनुष्य का दायित्व है कि अपने आस-पास के वातावरण को बेहतर बनाये। वैज्ञानिक नजरिया विकसित कर प्रगति के पथ पर समाज को अग्रसारित करें ताकि हमारा समाज बिना किसी भेद-भाव के जड़तावादी सोच से बाहर निकल कर एक चिंतनशील प्रगतिशील वैज्ञानिक नजरिया वाला पढ़ाकू समाज बने और इसके लिए हम सभी लोगो को पहल की आवश्यकता है। क्योंकि तथा कथित अपने गलत पंरपरा को स्थापित करने के लिए कुछ लोग धर्म का गलत व्याख्या कर आम-आवाम को ठगने का काम कर रहे है। और समाज में गैर-वैज्ञानिक सोच को विकसित कर अंधविश्वास, कट्टरता, अफवाह फैला कर हमारी साझी सांस्कृतिक विरासत को छिन्न-भिन्न करने की कोशिश की जा रही है। ऐसी परिस्थिति मे समाज के वैसे तपका जो इंसानियत के हिफाजत के लिए प्रत्यनशील है, का  दायित्व बनता है कि वे समाज को सही दिशा प्रदान करने मे अपनी भुमिका अदा करे ताकि आने वाली पिढ़ी को एक बेहतर वातवरण मिल सके प्रगति के लिए।

इन्ही सब तथ्यों पर चर्चा करने के लिए भारत ज्ञान विज्ञान समिति एवं मासिक प्रत्रिका सुबह की धूप के संयुक्त तत्वावधान में 20 अगस्त 2018 राष्ट्रीय वैज्ञानिक दृष्टिकोण दिवस के अवसर पर ‘‘वैज्ञानिक चेतना और हमारा समाज’’ विषय पर सेमिनार आयोजित किया है।

राज्य स्तरीय सेमिनार पं. दीन दयाल उपाध्याय स्मृमि सभागार (टाउनहॉल) मेंदिनीनगर में होने जा रहा है जिसमे देश के जाने माने विद्वान के आलावे गांव और कसबे से सैंकड़ों जन वैज्ञानिक सिरकत करेंगे जो बेहतर समाज के लिए कार्यरत है। इसके साथ ही साथ आयोजक द्वारा बेहतर कार्य करने वाले समाज के अगुआ को ‘‘वैज्ञानिक चेतना सम्मान’’ से सम्मानित किया जायेगा ताकि वे प्रेरक की भूमिका में समाज में दिखाई दे।

क्योंकि वर्तमान समय में हमारे देश में इतिहास की तथ्यहीन मनगढ़ंत व्यवस्था, मिथक को एतिहासिक वैधता प्रदान करने की कोशिश ने विज्ञान को आस्था और श्रद्धा से जोड़ कर लोगो को बरगलाने की कोशिश जारी है। परिणाम स्वरूप लाखो लाख श्रधालुओं का मानसिक, शारिरिक, आर्थिक दोहण कर चंद बाबाओं का आर्थिक, राजनैतिक, समाजिक समाज फैल गया। जिस वक्त इनका पर्दाफास होता है तब तक हजारों बालाओं का स्मत लुट चुका होता है। लाखों लोग अपनी बदहाली पर आंसू बहाता है। जब तक ये समझते तबतक बहुत देर हो चुका होता है।

इन्ही सब बातो पर चिंतन मनन करने के लिए सेमिनार का आयोजन किया गया है। अगर हमें वैज्ञानिक टेम्पर वाला समाज चाहिए तो समाज के सभी तपके के लिए मजदूर, किसान, छात्र, नौजवान, महिला, डॉक्टर, इंजिनियर, साहित्यकार, पत्रकार, कलाकार सभी को आगे आना होगा। हम सभी से सेमिनार के माध्यम से संदेश देना चाहते है कि आगे आइये और वैज्ञानिक चेतना के विकास और इसे मजबूती प्रदान करने का काम करें ताकि भारतीय लोकतंत्र अपने लोकतांत्रिक तरिके से विकसित, वैज्ञानिक सोच पर आधारित समाज का निर्माण किया जा सके।

सेमिनार के साथ-साथ तीन बजे से कवि सम्मेलन सह मुशायरा का भी आयोजन किया गया है। जिसमे कई युवा चेहरा कविता पाठ करते दिखाई देंगे। एवं अपने साहित्यिक, सांस्कृतिक दायित्वों का निर्वहन कर आने वाले पिढ़ी के लिए एक बेहतर वातावरण बनाएंगे।



रामानुग्रह सिंह

कार्यकारी अध्यक्ष,

ज्ञान विज्ञान समिति झारखण्ड


डॉ. श्यामदेव मेहता

अध्यक्ष

आयोजन समिति


अभय वर्मा

महासचिव

आयोजन समिति


शिव शंकर प्रसाद

संपादक

सुबह की धूप