हिंदी दिवस के अवसर पर कवि-सम्मेलन का आयोजन

हिंदी दिवस के अवसर पर कवि-सम्मेलन का आयोजन

 

    पलामू-हुसैनाबाद के ब्लॉक रोड स्थित सनशाइन प्ले पब्लिक स्कूल के प्रांगण में साहित्यिक संस्था मौसम के तत्वावधान में हिंदी दिवस के उपलक्ष पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत संस्था के अध्यक्ष युवा कवि विनोद सागर ने माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भूतपूर्व डीएसपी डॉ0 राम किंकर सिन्हा ने कहा कि हिंदी सबकी है मगर हिंदी को जिंदा रखने के लिए किसी भी सरकार ने कोई कार्रगर पहल नहीं किया। अगर आज हिंदी जिंदा है तो अपनी बदौलत, इसलिए हमें चाहिए कि हम ज्यादा-से-ज्यादा हिंदी का प्रचार-प्रसार करें, ताकि हिंदी समृद्ध भाषा बन सके।   कवि सम्मेलन के दौरान युवा कवि विनोद सागर ने अपनी कविता 'भारत में आकर अंग्रेजी दुल्हन हो गई, अपने ही घर में हिंदी सौतन हो गई' एवं 'हिंदी हो पहचान अपनी, हिंदी का ऐसा सम्मान हो, हिंदी हो जन-जन की भाषा, हिंदी से हिंदुस्तान हो' से शुरूआत की, वहीं शेख मुजाहिद हुसैनाबादी ने अपनी रचना 'नृत्य के मंच पर हर्ष की वर्षा में, निस दिन पूजा की थाली पर, श्री गणेश-शंकर की आस्था बन हिंदी हूँ मैं' से सबका दिल जीत लिया। कवि बालमुकुंद भारती ने 'किस पर मोहर लगाऊँ, सब आपन-आपन चक्कर में' पँक्तियों द्वारा राजनीतिक व्यंग्य किया, वहीं वरीय कथाकार विपिन बिहारी ने अपनी रचना 'हैवानों का कोई मजहब नहीं होता, काफिरों का कोई रब नहीं होता' से कार्यक्रम में एक नई जान डाल दी। कार्यक्रम का मंच संचालन संस्था के सचिव मनोज कुमार प्रजापति ने किया, वहीं धन्यवाद-ज्ञापन बालमुकुंद भारती ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में मुकेश कुमार सिंह, प्रो0 शीला सिन्हा, शिवकुमार विश्वकर्मा, मेघनाथ ठाकुर, कमलेश कुमार आदि ने सक्रिय भूमिका निभाई।