छत्तरपुर (पलामू) करमा मिलन समारोह का आयोजन छत्तरपुर प्लस टू उच्च विद्यालय के स्डेडियम में आयोजित कार्यक्रम में पलामू प्रमंडल के सरना समाज के लोग हजारों की संख्या में महिला पुरुष उपस्थित हुए।

पलामू......छत्तरपुर अरविंद अग्रवाल की रिपोर्ट:- 

छत्तरपुर (पलामू) करमा मिलन समारोह का आयोजन छत्तरपुर प्लस टू उच्च विद्यालय के स्डेडियम में आयोजित कार्यक्रम में पलामू प्रमंडल के सरना समाज के लोग हजारों की संख्या में महिला पुरुष उपस्थित हुए। मंच पर उपस्थित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मेघा उराँव व छत्तरपुर नगर पंचायत अध्यक्ष मोहन जयसवाल, सुनीता देवी, सविता देवी, हरकेश उराँव,अवधेश उराँव  सरना समिति के प्रखंड अध्यक्ष मुनी उराँव सभी संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम शुभारंभ किया । वही मंच संचालन श्यामलाल राम ने किया। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए अपनी कुडुख संस्कृति से अवगत कराया। मुख्य अतिथि मेघा उराँव ने बताया कि ऐसे आयोजन से हमें अपने पूर्वजों की संस्कृति के बारे जानने की प्रेरणा मिलती है। हम सभी को अपनी भाषा एवं संस्कृति का आदर करना चाहिए क्योंकि हमारी पहचान ही हमारी संस्कृति है। पलामू प्रमंडल के कई गांव के लोगों ने समारोह में शामिल होकर मांदर की धुन पर गीत और नृत्य प्रस्तुत किए। सरना समाज के लोगों ने कर्मा को हमारे संस्कृति  का प्रतीक भी माना जाता है।कर्मा नृत्य छत्तीसगढ़  और झारखण्ड की लोक-संस्कृति का पर्याय भी है।छत्तीसगढ़ और झारखण्ड केआदिवासी और ग़ैर-आदिवासी सभी इसे लोक मांगलिक नृत्य मानते हैं।कर्मा पूजा नृत्य, सतपुड़ा और विंध्य की पर्वत श्रेणियों के बीच सुदूर गावों में विशेष प्रचलित है। शहडोल, मंडला के गोंड और बैगा एवं बालाघाट और सिवनी के कोरकू तथा परधान जातियाँ कर्मा के ही कई रूपों को आधार बना कर नाचती हैं। बैगा कर्मा, गोंड़ कर्मा और भुंइयाँ कर्मा आदि वासीय   नृत्य माना जाता है। छत्तीसगढ़ के लोक नृत्य में ‘करमसेनी देवी’ का अवतार गोंड के घर में हुआ ऐसा माना गया है, एक अन्य गीत में घसिया के घर में  माना गया है। सरना मिलन समारोह कार्यक्रम से छत्तरपुर शहर गुंजायमान रहा।समाचार लिखे जाने तक कार्यक्रम शांति पूर्ण चलता रहा।