सुखाड़ व अकाल से त्रस्त ग्रामीणों का पलायन करने को मजबूर हैं किसान, किसी तरह का कोई सुविधा नहीं... छत्तरपुर अरविंद अग्रवाल की रिपोर्ट:-

:- मौसम के बेरुखी से धान की फसल चौपट...


सुखाड़ व अकाल से त्रस्त ग्रामीणों का पलायन करने को मजबूर हैं किसान, किसी तरह का कोई सुविधा नहीं...

छत्तरपुर अरविंद अग्रवाल की रिपोर्ट:-


छत्तरपुर (पलामू) मौसम की बेरुखी से छत्तरपुर अनुमंडल का इलाक़ा इस बार अकाल और सुखाड़ के आगोश में सामने को खड़ा है वर्षा अपना लगभग पूरा सफर तय करने को अग्रसर में है इसमें खेती के महा शुभ सभी नक्षत्र समाप्ति की ओर है इस दौरान क्षेत्र के किसानों ने छिटपुट आंशिक वर्षा के छोड़कर प्राप्त वर्षा नहीं देखी हालांकि किसानों को हथिया नक्षत्र में बारिश होने का अंदाजा लग रहा था लेकिन वह भी सपना सकार रह गया जिससे किसानों के चेहरे मुरझा गए हैं तपती धूप देखकर किसान घबराने लगे हैं भगवान सूर्य की तपिश इंद्र के बादल पर भारी पड़ना सुखाड़ व अकाल के लक्षण को प्रदर्शित करता है मौसम की बेरुखी से जहां एक और पलामू प्रमंडल का मुख्य फसल भदई चौपट हो गया है इसमें भदई फसल अंतर्गत गरीबों का मुख्य आजार मकई,तील,उरद, बराई,व मूंग की खेती मुख्य रूप से जीविकोपार्जन का साधन माना जाता है लेकिन फसल नहीं होना गरीबों के निवाला पर आफत आने का सामना है बल्कि इलाके के 18 फ़ीसदी वैसे भूमि पर भदई  फसल के साथ धान की बुवाई भी 46 फ़ीसदी की गई है वहीं फसल न के बराबर है। लेकिन फसल के पर्याप्त विकास के लिए फसल के जड़ में भी नहीं, बल्कि ऊपरी बारिश की आवश्यकता पड़ती है।मगर इसकी संभावना नजर नहीं आ रही है। बारिश के अभाव में प्रमंडल सुखाड़ और अकाल की दहलीज पर खड़ा है वहीं 3 से 4 दिनों के अंदर बारिश नहीं हुई तो क्षेत्र में धान के खेत में दरार पड़ना शुरू हो गया है किसानों का कहना है कि धान को पानी नहीं मिला तो धान का उत्पादन घट जाएगा ऐसे में भी धान कमोवेश पानी के वजह से धान पीला होना तथा मुआर जैसा शुरू हो गया है।सितंबर माह के दौरान 206 पॉइंट 6 मिली मीटर सामान्य बारिश होती है इस बार 3 अक्टूबर तक लगभग 133 पॉइंट 20 मिलीमीटर बारिश हुई है बताते चलें कि 18 दिनों से प्रमंडल में बारिश नहीं होने से क्षेत्रों में धान के पौधे में पीलापन आने लगा है और धान के पौधों के खेत में दरार भी पढ़ना शुरू हो गया है कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि 2 से 5 दिनों के अंदर बारिश नहीं हुई तो धान का उत्पादन घटना तय है।वहीं  छिटपुट किसानों को देखा जाए तो किसान किसी प्रकार डीजल पंप के सहारे धान को बचाने में पटवन करने के व्यस्त हैं।ताकि  धान बच सके।और जिसके पास कोई सिंचाई के साधन का व्यवस्था नहीं है वैसे किसान चिंतित हैं उनकी फसल प्रभावित होने लगी है।छतरपुर अनुमंडल क्षेत्र के ग्राम सड़मा के किसान कईल यादव, हरि यादव, राजेश यादव, बनू यादव,नंद केसर यादव, संतोष कुमार,विजय ठाकुर, कैलाश उराँव, रमेश यादव,कमलेश यादव, लोकी यादव, शिव प्रसाद यादव, समेत सैकड़ों किसान ने बताया कि बारिश नहीं होने के कारण खेत में लगे सारे फसल खेत में मर गए किसानों का कहना है कि विभिन्न माध्यमों से कर्ज लेकर खेत में फसल लगाए थे लेकिन बारिश की वजह सब फसल सूखने लगा है और धान के खेत में दरार पड़ने लगी है हाथिया नक्षत्र  का पानी नहीं होने से धान पीला पड़ने लगा वहीं किसान ने बताया कि धान के पौधों में बाली तो आ जाएगा लेकिन पानी के अभाव में दाना नहीं पकड़ेगा और धान की पैदा खत्म हो जाएगा। देखा जाए तो  वर्तमान में  स्थिति यह है कि धान का 30 फीसदी भी पैदावार नहीं हुई, वहीं किसान ने बताया कि इस बार पूरी तरह से अकाल हो गया है।  पैदावार नहीं होने से आने वाले कुछ महीनों में  जानवरों को खाने के लिए  चारा भी नहीं मिलेगा। वहीं किसानों के लिए  वर्ष  2018  अच्छा नहीं रहा । समय से अच्छी वर्षा नहीं होने से  किसानों की परेशानी बढ़ गई।  किसान विगत वर्ष  धान की अच्छी  ऊपर से उत्साहित थे। डीजल की बढ़ी कीमतों के कारण भी  किसानों को  सिंचाई करने में काफी परेशानी हुई। इन सुखाड़ की काली छाया के मद्देनजर इन दिनों इलाके के सैकड़ों गांव के लोग प्रतिदिन अन्यंत्र राज में पलायन के लिए मजबूर हो जाते हैं क्षेत्र के युवाओं का अपने घर परिवार से दूर रहना प्रकृति की विकट स्थिति से नियति का शुभ  नहीं माना जाता है ।

वर्तमान हालात यह है कि इलाके के सुदूर बरती ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुषों की संख्या कम देखी जाती है इस और किसी भी राजनेता व प्रशासनिक पदाधिकारी का ध्यान नहीं है। जबकि नगर क्षेत्र होने के बावजूद भी लोग पलायन करने के लिए मजबूर हैं साथ ही इस वर्ष के अंत में आगामी लोकसभा चुनाव पर भी पलायन की स्थिति भी प्रभावित होने की संभावना है।

.पानी के अभाव में किसान के धान सूखने के कगार पर पहुंच गए हैं पटवन का साधन नहीं होने पर किसान अपने ध्यान को कैसे जिंदा रख सकेंगे बारिश नहीं हुई तो सुखाड़ व अकाल की स्थिति आ जाएगी।


 बॉक्स:-2. धान के खेत में दरार पड़ने लगी है हथिया का पानी नहीं होने से धान पीला पड़ने लगा है बाली तो आ जाएगा लेकिन पानी के अभाव में दाना नहीं पकड़ेगा सड़मा ग्रामवासी ने बताया।