नवरात्र में कुंवारी कन्या पूजन का होता है खास महत्व....

छत्तरपुर के अग्रवाल परिवार ने नौ कुमारी कन्याओं का कराया भोजन...  


                                                         नवरात्र में कुंवारी कन्या पूजन का होता है खास महत्व....

छत्तरपुर (पलामू) :- नवरात्र में सप्‍तमी तिथि से ही कुवांरी कन्‍याओं का पूजन शुरू हो जाता है. इस दौरान कन्‍याओं को घर बुलाकर उनकी आवभगत की जाती है. दुर्गाष्टमी और नवमी के दिन कुवांरी कन्याओं को नौ देवी का रूप मानकर इनकी पूजा की जाती है. अपनी पूजा को संपन्न करने और मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए नवरात्र में लोग कन्या पूजन को विशेष महत्व देते हैं.

नवरात्र के दौरान कन्या पूजन का बड़ा महत्व है. नौ कन्याओं को नौ देवियों के प्रतिबिंब के रूप में पूजने के बाद ही भक्तों का नवरात्र व्रत पूरा होता है. मान्यता है कि अपने सामर्थ्य के अनुसार नौ कन्याओं को भोग लगाकर दक्षिणा देने मात्र से मां दुर्गा प्रसन्न हो जाती हैं. जो लोग पूरे नौ दिन का व्रत करते हैं वह तिथि के अनुसार नवमी और दशमी को कन्‍या पूजन करने के बाद ही प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलते हैं. अपने घर में नौ कन्याओं की पूजा करने के लिए लोग आस-पड़ोस से कन्याओं को आमंत्रित करते हैं और नवरात्र के दिन उनकी पूजा कर मां को प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं.छत्तरपुर प्रखंड के जाने माने समाजसेवी अग्रवाल परिवार ने कारमा कला गांव गुलाबचन्द अग्रवाल कॉलेज गेट स्थित अपने आवास पर शारदीय नवरात्र के नवमी के दिन यानी गुरुवार को नौ कन्याओं एक भैरोंनाथ की पूजा के लिए 10 साल से कम उम्र की कन्याओं को आमंत्रित कर अपने घर में उनकी विधि पूर्वक पूजा किया और बैठा कर हलवा,पुड़ी,खीर,और चना का भोजन कराया। समाजसेवी सचिदानन्द अग्रवाल ने कहा कि यह हमारी पुरानी परंपरा रही हैं.की प्रत्येक वर्ष नवरात्र के नवमी के दिन कम से कम नौ कुमारी कन्याओं को भोजन करवाएं इसी परंपरा को हमने निभाया है।सहयोगी में पत्रकार अरविंद अग्रवाल व नीलम अग्रवाल,मालती देवी,आलोक अग्रवाल,खुशबू अग्रवाल, मधु,श्रेया,सृष्टि,आयुष,अनन्या,अनिमेष सहित मौजूद थे।बताते चलें कि  हमारे देश में कन्याओं को देवी तुल्य मानकर पूजा जाता है, पर कुछ लोग नवरात्रि के बाद यह सब भूल जाते हैं. घर में बेटी के पैदा होने पर लोग दुखी हो जाते हैं. वहीं कई जगहों पर कन्याओं का शोषण होता है और उनका अपनाम किया जाता है. आज भी बेटियों को अपने बराबरी के हक के लिए लड़ना पड़ता है. कन्याओं और महिलाओं के प्रति हमें अपनी सोच को बदलने की जरूरत है. देवी तुल्य कन्‍याओं का नवरात्र के अलावा बाकी दिन भी सम्मान करना चाहिए. बदलते समय के साथ अपनी सोच को भी बदलना जरूरी है. माना जाता है कि नवरात्रि में कन्याओं का देवियों की तरह आदर सत्कार और भोज कराने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को सुख समृधि का वरदान देती हैं. नन्ही कन्याओं को घरों में आमंत्रित कर उनकी पूजा कर लोग मां दुर्गा को प्रसन्न करते हैं. पर केवल एक दिन की कन्या पूजा से मां प्रसन्न नहीं होती. शास्‍त्रों में भी लिखा है कि जिस घर में महिला का सम्‍मान किया जाता है वहां भगवान खुद वास करते हैं.