डुमरिया में कोल्हान दिवस मना


कोल्हान - मानकी-मुण्डा-डाकवा पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था पूर्वी सिंह भूम जिला की ओर से डुमरिया प्रखंड के स्वर्गचिड़ा में कोल्हान दिवस मनाया गया.

आज ही के दिन दिनांक 2 दिसम्बर सन् 1833 इसवीं को आदिवासी हो लोगों का पहला संविधान बंगाल रेग्युलेशन एक्ट 13 लागू हुआ.

यही संविधान प्रावधान अनुसूचित जिला अधिनियम 1874 भारत अधिनियम 1919, 1935 के तहत भारत का संविधान में 5वीं एवं 6वीं अनुसूची में दर्ज है.

बंगाल रेग्युलेशन एक्ट 13 सन् 1833 हो लोगों का पहला लिखित दस्तावेज कानून है और इसी कानून के तहत कोल्हान में देश के सामान्य क्षेत्रों का कानून को समाप्त करते हुए स्वशासन व्यवस्था को मंजूरी दी गई थी, यानि विधि वहिर क्षेत्र घोषित हुआ, आज भी हम लोग उसी कोल विद्रोह के वीरों के कर्ज पर 5वीं अनुसूची में दर्ज है.

सन् 1820-21 में हो विद्रोह एवं सन् 1830-31 में महान कोल विद्रोह हुआ था जो अपने आप में बहुत ही बड़ा इतिहास है, इस इतिहास को सभी पाठ्यक्रमों में शामिल किया जना चाहिए,

यह बातें आदिवासी हो समाज महासभा, अनुमंडल समिति, घाटशिला पूर्वी सिंह भूम के सचिव एवं प्रभारी मानकी भोंजो सिंह बानरा ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा.

कोल्हान दिवस को मनाने के लिए उपस्थित लोगों के नाम- भोंजो सिंह बानरा, वैदु होनहागा, तिरबन जामुदा, कायरा तियु, बूढ़ान सिंह बारी, जुगू मुंडरी, दुम्बी मुंडरी, कविराज सूंडी, हरे कृष्णा प्रेमी बोदरा, डेमका सोय, सिराम बानरा, सुरा पूर्ति, बीरबल लेयांगी, दलमा राजा राकेश हेम्ब्रम, गंगा राम सूंडी, मिचराय बरदा, आनंद सिंह कूंटिया, आदिवासी हो समाज युवा महासभा के डुमरिया प्रखंड अध्यक्ष कुंवर पूर्ति, डॉक्टर बबलू सूंडी आदि विभिन्न ग्रामों से लोग उपस्थित होकर आने वाले समय में सुदृढ़ रूप से कोल्हान दिवस मनाने का संकल्प लिया....!